Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 30, 2014

बरसें कहाँ


1-मंजु मिश्रा

1

प्रकृति सोचे –

कौन आया लूटने

सम्पदा मेरी ।

2

वन जंगल

पहाड़ और खेत

सब गायब ।

3

बरसों हुए

जब होती थी एक

नदी यहाँ पे ।

4

अब तो सब

उजाड़ ही उजाड़

औ प्यासी धरा ।

5

आसमान से

बरसती है आग

ये कोप ही है ।

6

मिलता नहीं

ठिकाना बादलों को

बरसें कहाँ ।

 -0-

2-रेनु चन्द्रा

1

काले बादल

पुरवाई ले उड़ी

करे ठिठोली

2

वर्षा की बूँदें

नहलातीं वृक्षों को

पत्ते हर्षाए

3

सावन आया

लहरिया चुनरी

धरा ने ओढ़ी

4

प्यासी धरती

सावन के आँगन

आतृप्त हुई

5

सोंधी खुशबू

साँस भरी शब्दों ने

कविता भीगी

 

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Responses

  1. मिलता नहीं
    ठिकाना बादलों को
    बरसें कहाँ ।
    -0- कटु सत्य है परयावरण के विनाश का | बहुत सुन्दर हाइकु| बधाई मंजु जी

    सोंधी खुशबू
    साँस भरी शब्दों ने
    कविता भीगी । बस यही तो सुन्दर अभिव्यक्ति के गुण हैं | बधाई आपको रेणु जी |

  2. मानव लोभ की वजह से बदलते पर्यावरण को दर्शाते सटीक हाइकु सृजन के लिए मंजु मिश्रा जी आपको हार्दिक बधाई एवं वर्षा ऋतु पर बेहतरीन हाइकु रचने के लिए रेनु चन्द्रा जी आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं – सुभाष लखेड़ा

  3. “बरसें कहाँ”…पर्यावरण के प्रति सचेत करते प्रभावी हाइकु ..बधाई मंजु जी !!

    वर्षा पर बहुत सुन्दर भाव पूर्ण हाइकु …बहुत बधाई रेणु जी

  4. prakitik paryavarn ka hras aur uska dushprabhav dikhate manju ji ke haiku va vyathit – ujadi prakriti bhi mauka pate hi jeevant hokar sondhi khushbu bikherti nahin thakati savan ki ritu ,uspar barish ho to prakriti jhumegi kyonki use to sabka man rakhana hai.renu ji ko sarthak haiku srijan hetu badhai.
    pushpa mehra.

  5. सुंदर हाइकु
    मंजू जी , रेनू जी बधाई

  6. vasrsha par sunder v sashakt abhiyakti ko naman….manju ji tatha renuji ko badhai.

  7. बरसों हुए
    जब होती थी एक
    नदी यहाँ पे ।
    आगे की पीढी को हम ऐसे ही बताएँगे अगर अब भी नहीं चेते तो…|

    सोंधी खुशबू
    साँस भरी शब्दों ने
    कविता भीगी ।
    बहुत सुन्दर…|
    आप दोनों को हार्दिक बधाई…|

  8. मिलता नहीं
    ठिकाना बादलों को
    बरसें कहाँ ।………पर्यावरण की ओर चौकस करता बढ़िया हाइकु…बधाई मंजु जी !

    सोंधी खुशबू
    साँस भरी शब्दों ने
    कविता भीगी ।…….बहुत सुन्दर हाइकु….बधाई रेनू जी !


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