Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 24, 2014

नेह मिलेगा


डॉ आरती स्मित

1

मेरा संसार 

खुशियों का बाज़ार 

ले लो खुशियाँ  ।

2

दलदल में 

रेंगता बचपन 

कैसा जीवन ?

3

भरे दामन 

मुसकाए बचपन 

पेट भरा हो  ।

4

झुग्गी- झोपड़ी 

महल- इमारत 

कैसी समता ?

6

नेह ही नेह 

लुटाती चलो स्मित 

नेह मिलेगा ।

7

आपका स्नेह 

यादों की धरोहर 

सँभालूँगी मैं 

8

उदास आँखें 

शून्य में तलाशती 

आशा के रंग

10

धूम मचाए 

सपन सलोने -से 

प्यारे बादल  ।

11

खुला फव्वारा 

पीने  को पानी नहीं 

सूखे अधर  ॥   

12

छैल छबीली 

करती अठखेली 

ऋतु सहेली  ।

13

याद आती माँ 

आषाढ़ की फुहार 

भीगता मन

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Responses

  1. बहुत सुन्दर हाइकु…बधाई…|

  2. दलदल में
    रेंगता बचपन
    कैसा जीवन ?
    sundar…

  3. बहुत सुन्दर हाइकु सभी …
    याद आती माँ
    आषाढ़ की फुहार
    भीगता मन ।…सचमुच मन भिगो गया ..बहुत बधाई !

  4. bahut sunder haiku arti ji badhai.
    pushpa mehra.

  5. उत्कृष्ट हाइकु .
    बधाई

  6. sabhi haiku bahut sunder..daldal mein rengta bachpan….man choo gaya…badhai arti ji .

  7. सभी हाइकु बेहतरीन हैं ; आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।

  8. छैल छबीली

    करती अठखेली

    ऋतु सहेली ।

    उत्कृष्ट हाइकु .बधाई


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