Posted by: हरदीप कौर संधु | जुलाई 22, 2014

पावस अलबेली


डॉ. सुधा गुप्ता

1

MEGH-1खड़ी है सजी

पावस अलबेली

भू की सहेली ।

2

नभ उमड़ी

भरपूर फ़सल

नीले मेघों की ।

3

चुरा ले गई

कोई नीली ओढ़नी

नभ की बिन्दी ।

4

रात उदास :

मेघमेले की भीड़

खोई बिन्दिया ।

5

आए सावन

तने हैं शामियाने

नीले कासनी ।

6

मोती की झार :

धरावधू ने पाई

मुँह दिखाई

7

उमड़ रहा

नववधू धरा का

रूप का ज्वार ।

3-अनीता8

हरी चुँदड़ी

चाँदी सोने के तार

बूँटेकढ़ी है ।

9

नभ से  झरे

मेघप्रेमोपहार:

आग के फूल ।

10

मेघों की पीर :

दिखाए दिल चीर

आग लकीर ।

11

पहली वर्षा :

रूखीसूखी थी धरा

खूब नहाई ।

12

अल्हड़ निशा

बारिश की धुन पे

नाचती रही ।

MEGHA-213

बरसे पिया

तनमन से तृप्त

बुझी भू तृषा ।

14

लाए सावन

कुठला भर धान

होठों की हँसी ।

15

मेघ जो झरे

सोखे धराकोख ने

खिले गुलाब ।

16

लौटा के लाया

सावन का पाहुना

खोई मुस्कान ।

17

आए हैं इन्द्र

प्रियावृष्टि के साथ

करो सत्कार !

18

घिरे पड़े हैं

अमराई के झूले

मेघमल्हार ।

19

अब जो आए

जाना नहीं बिदेस

कहे धरती ।

20

मैं तो उर्वरा

छोड़ना न परती

मैं फलवती ।

21

मेघों में सूर्य

नील सर में खिला

स्वर्ण कमल ।

-0-

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Responses

  1. आपके सभी हाइकु बेहतरीन हैं ; बेहतरीन सृजन के लिए आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।

  2. अतिसुन्दर चित्रण। आ. सुधा दीदी जी की लेखनी से…

    ~ वर्षा बहार
    सावन की फुहार
    क्या खूब झरी ~

    हार्दिक अभिनन्दन स्वीकारें दीदी जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  3. सभी हाइकु अति विशेष लगे
    सादर नमन .

  4. sudhaji,aapki lekhani ko angin pranaam hai…ma sarswati ka vishesh aashirvaad mila hai aapko …aap hamesha hi adbhud kalpna ki anusandhaankarta hai…ati sunder saare hi haiku…

    चुरा ले गई

    कोई नीली ओढ़नी

    नभ की बिन्दी ।

    रात उदास :

    मेघ-मेले की भीड़

    खोई बिन्दिया ।

    मेघों में सूर्य

    नील सर में खिला –

    स्वर्ण कमल ।

    ye itne pyre lage ki inhe baar-baar padhkar swayam ko dhany maan rahi hou
    naman aapko v aapki lekhni ko prano se.

  5. sudha didi apke sabhi haiku bahut sunder naveen shrengar se saje hain.ati uttam srejan-dhara ke nav roopon sa.badhai kya dun pashansa hi…………….
    prashansa karte hue naman.
    pushpa mehra.

  6. अति सुन्दर प्रस्तुति सुधा गुप्ता जी….हार्दिक बधाई !

  7. मोती की झार :

    धरा-वधू ने पाई

    ‘मुँह दिखाई’।

    आदरणीय सुधा जी, यूँ तो सारे ही हाइकु नवेली दुल्हन के शृंगार जैसे हैं किन्तु यह विशेष लगा |बहुत बधाई आपको |

  8. वर्षा के सुन्दर बिम्ब उकेरते बहुत सुन्दर , मोहक हाइकु दीदी !
    सभी एक से बढ़कर एक …
    मेघों की पीर :
    दिखाए दिल चीर
    आग –लकीर । … मोती की झार . अल्हड़ निशा और स्वर्ण-कमल बहुत बहुत अच्छे लगे

    सादर नमन आपको !

  9. wahhh lajawab … sabhi ek se badh kar ek ..
    naman hai

  10. खड़ी है सजी

    पावस अलबेली

    भू की सहेली ।

    Sabhi haiku eak se badhkar eak hain jitni taaref ki jaye kam hai…

  11. सुधा जी जब लिखती हैं तो उनके किसी एक हाइकु को तारीफ के लिए चुन पाना लगभग असंभव सा लगता है…| बहुत बधाई और आभार…|

  12. खड़ी है सजी

    पावस अलबेली

    भू की सहेली ।

    आए हैं इन्द्र

    प्रिया’वृष्टि’ के साथ

    करो सत्कार !

    बहुत ही मनभावन और उत्कृष्‍ट हाइकु। नमन सुधा दी को।


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