Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 20, 2014

चाँद क्यों झाँके


1-मंजुल दिनेश

1

सोने का मृग ,

सुन्दर-सा छलावा ,

दुनिया जैसा ।

2

कृष्ण -बाँसुरी

अनहद नाद- सी

सुध बिसारे

3

मेघ गरजें

तालाब आकुल हैं

नीर ओढ़ने ।

4

बादल खेलें

लुका- छिपी पेड़ों में

चाँद क्यों झाँके ।

5

सौरभ- खेला

पल्लव हैं हिंडोला

भोर की बेला ।

6

ताल  भी सूखे

सरकी नदी नीचे

ओस नहाने ।

7

तपती राहें

उबलता दिन

सूरज  हँसे ।

8

मेघ चितेरा ,

छवि मौन उकेरे ,

रँगे आकाश

9

गर्म ऋतु जा

बादल को छल ला

अहं सोने जा ।

10

बिजली कौंधी

नभ आँख दिखाए

मेघ चिल्लाएँ

-0-

2-मंजु गुप्ता

1

स्नेहिल धारा

जहाँ बहे वहाँ पे

शान्ति है बसे ।

2

मन कलम

रचे बारहमासा

व्यथा – कथा के ।

3

भीषण मेघ

जलजला बनके

जीवन छीने ।

4

भू पर नाचीं

शुभ शकुन बन

मेह- बौछारें ।

5

शर्मा के चले

बूँदों की चुन्नी ओढ़

बरखा बाला ।

-0-

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Responses

  1. मंजुल दिनेश जी और मंजु गुप्ता जी ! आपके हाइकु मन को भाए ; आप दोनों को हार्दिक बधाई ।

  2. आभार सुभाष जी .

  3. Bahut gahan abhivyakti bahut bahut shubhkamnayen ..,,

  4. मन कलम
    रचे बारहमासा
    व्यथा – कथा के

    बहुत सुंदर रूपक बांधा है मंजु जी ने। बधाई

  5. बिजली कौंधी
    नभ आँख दिखाए
    मेघ चिल्लाएँ ।
    क्या बात है…|

    मन कलम
    रचे बारहमासा
    व्यथा – कथा के ।
    मन तो जाने क्या क्या लिख लेता है…|
    हार्दिक बधाई…|


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