Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 19, 2014

दुबका सूर्य


पुष्पा मेहरा      

1

तरसी घनी

पाई न अभी तक

मोती की लड़ी ।

2

ओढ़ के सोई

काली मोटी रजाई

आज की रात ।

3

हँसना भूला

चंदा वह मोहना

बंदी घर का ।

4

ले के जो भागे

स्वर्ण-किरण-रथ

दुबका सूर्य ।

5

आए जो छाए

सिर फिरे थे घने

टरे ही नहीं ।

6

बावरे मना

गरजे, झूमे-नाचे

ख़ूब वे झरे ।

7

कहते घन-

भर देंगे आँचल

सूनी धरा का ।

8

लुढ़का रहे

मटके ही मटके

खाली न होते ।

9

आओ बटोरें

ख़ुशियाँ ही खुशियाँ I

थाम लें हाथ ।

-0-

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Responses

  1. सुन्दर वर्षा हाइकु ..बहुत सुन्दर बिम्ब लिए ….हार्दिक बधाई आपको !!

  2. पुष्पा मेहरा जी ! आपके सभी हाइकु बेहतरीन हैं ; आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।

  3. Prakrti par likhe haiku bahut achhe or hatkar lage bahut bahut badhai…,

  4. आदरणीय पुष्पा जी सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे खासकर 2.3 हार्दिक बधाई
    On Jul 19, 2014 9:06 AM, हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  5. jyotsna ji,subhash ji bhavna ji , sashi ji apne hamare haiku apna amulya samay de kar padhe aur sarahe is hetu main apko dhanybad deti hun.
    pushpa mehra.

  6. बेहतरीन हाइकु के लिए बहुत बधाई…|


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