Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 18, 2014

झूमे है धरा


1-अनिता कपूर

1

शांत हो गई

मरु धरा की रूहें

वर्षा जो आई ।

2

झूमे है धरा

पाँवों बूँद पायल

रास है रचा ।

3

मन मोहते

करे वर्षा के झोंके

ता -ता –थईया ।

4

बाँसुरी- धुन

बजाएँ मेघ, राधा

हुई फुहार ।

-0-

2-शान्ति पुरोहित

1

धरा निराश

लौट गये बदरा

बिन बारिश

2

सावन माह

हरियाली चूनर

ओढती धरा

3

सावन झड़ी

हृदय पुलकित

मीत की प्रीत

4

तीज त्योहार

सावन की बहार

ख़ुशी अपार

5

खिली है रात

पारदर्शी चाँदनी

प्रकाश– नदी ।

-0-

3-सविता मिश्रा

1

मेघ विप्लव

झमाझम बरस

भू त्राहि- त्राहि।

2

चूनर हरी

बूढ़ी  धरा युवा-सी

ओढ़ के चली।

3

सावन आया

मही जवान हुई

मेघ मिलाप।

4

धरा रसीली

सावन लगते ही

उन्मुक्त सृष्टि ।

-0-

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Responses

  1. झूमे है धरा
    पाँवों बूँद पायल
    रास है रचा ।

    धरा निराश
    लौट गये बदरा
    बिन बारिश ।

    धरा रसीली
    सावन लगते ही
    उन्मुक्त सृष्टि । …सुन्दर हाइकु ..बहुत बधाई अनिता जी , शान्ति पुरोहित जी एवं सविता जी !

  2. anita ji va varsha se sambandhit sabhi haiku achhe likhe hain. anita ji shanti ji va savita ji apko badhai .

    pushpa mehra.

  3. सभी हाइकु बेहतरीन हैं ; बेहतरीन सृजन के लिए अनिता जी , शान्ति पुरोहित जी एवं सविता जी ! हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।

  4. सभी हाइकु सामयिक और बहुत अच्छे लगे…| सभी को हार्दिक बधाई…|


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