Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 17, 2014

यादों का पेड़


1-सुभाष लखेड़ा

1

यादों का पेड़

बुढ़ा गया लेकिन

है हरा– भरा ।

2

वर्षों के बाद

भूलना चाहा जो भी

वही है याद ।

3

बदरी छाए

याद तभी उनकी

मुझे सताए।

4

याद आएंगे

दिल में उतरे जो

कहाँ जायेंगे।

5

नींद चुराएँ

जब कभी रातों में

वे याद आएँ ।

6

है फ़रियाद

किस्से बेवफ़ाई के

न आएँ याद।

7

बेचैन दिल

फिर कह रहा है

उनसे मिल।

8

अपनी बात

कभी कह न पाया

मन शर्माया।

-0-

2-शशि पाधा

1

निर्जन पथ

चंदा दीपक स्तम्भ

मन ना हार ।

2

लक्ष्य सुरक्षा

सेवारत, सजग

सीमा प्रहरी ।

3

वनस्पतियाँ

पात पात जीवन

करें गुहार ।

-0-

3-शशि पुरवार

1

मन देहरी

बिखरे है आखर

जन्मी कविता

2

ख्वाब सजाओ

छोटी- छोटी खुशियाँ

यूँ ही पा जाओ

3

तेज धूप में

नेह की ठंडी छाँव

माँ का आँचल

-0-

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Responses

  1. बहुत सुन्दर भाव पूर्ण हाइकु …मन देहरी ,मन ना हार तथा यादों का पेड़ अनुपम हैं ..हार्दिक बधाई आदरणीय लखेड़ा जी , शशि दी एवं शशि पुरवार जी !!

  2. वर्षों के बाद
    भूलना चाहा जो भी
    वही है याद ।
    यादें तो ऐसी ही निर्मोही होती हैं न…|

    निर्जन पथ
    चंदा दीपक स्तम्भ
    मन ना हार ।
    बहुत प्रेरणादायक…|

    मन देहरी
    बिखरे है आखर
    जन्मी कविता
    बहुत सुन्दर…|
    आप सभी को हार्दिक बधाई…|


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