Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 2, 2014

कविता आए


1-गिरीश पंकज

1

कविता आए

मन होता है जब

पावन कभी।

2

कविता नहीं

है विलासिता कोई

साधना सच्ची।

3

कविता नहीं

है विलासिता कोई

साधना सच्ची।

-0-

2-अनुपमा त्रिपाठी

1

छाई है घटा

ज्यों आस घनेरी सी

शीतल मन ।

2

बैन श्याम के

बसे घट-घट में

बने बाँसुरी ।

 -0-

3-अनिता ललित

1

रात न हो तो,

सुबह की महिमा,

क्या कोई जाने?

 


Responses

  1. sabhi haiku bahut achhe hain girish ji, anupama ji,anita ji apko badhai.
    pushpa mehra.

  2. गिरीश पंकज जी, अनुपमा त्रिपाठी जी… सभी हाइकु बहुत सुन्दर !
    हार्दिक बधाई आपको !!! 🙂

    ~सादर
    अनिता ललित

  3. सब हाइकु बहुत सुन्दर !
    गिरीश जी, अनुपमा जी, अनीता जी हार्दिक बधाई !

  4. सभी हाइकू सुन्दर ..बधाई विशेष कर गिरीश जी का हाइकू
    कविता आए

    मन होता है जब

    पावन कभी।
    बहुत ही शानदार है

  5. Meri badhai…

  6. गिरीश जी आपका कविता नहीं ….हाइकु गहरे भाव भरे हैं | आपको इस रचना पर हार्दिक बधाई |अनुपमा जी और अनीता जी आपको भी सुंदर रचना पर हार्दिक बधाई |

  7. मोहक हाइकु सभी …बहुत बधाई गिरीश पंकज जी ,अनुपमा जी एवं अनिता जी …हार्दिक शुभ कामनाएँ !!

  8. भक्‍ति और दर्शन की छटा लिए सुंदर हाइकु। रचनाकारों को सुंदर सृजन के लिए बधाई !

  9. सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई…|


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