Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 29, 2014

प्रेम कोयला


1-डॉ अनिता कपूर

1

रात सुरंग

सूरज लुढ़कता

बाहर आया

2

लपेटे दिन

म्बल बादलों का

खुद भी भीगा

3

रात की कोख

ख़्वाबों की पीड़ा सुन

तड़प रही

4

प्रेम कोयला

कहीं सुलगता– सा

कहीं बुझा सा

-0-

डॉ सरस्वती माथुर

1

जल का प्याला

अमृत जीवन का

रस निराला !

2

जल चलनी

सागर लहरों से

रेत छानती ।

3

प्यासी है रेत

भीगी लहरों संग

जल सोखती।

4

मन में छल

मटमैली सोच का

गंदला जल ।

-0-

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Responses

  1. sabhi haiku bahut achhe likhe hain.anita ji va mathu ji ap dono ko badhai.
    pushpa mehra.

  2. anitaji v sarswatiji …sabhi haiku bahut pyre lage …badhai
    raat surang…tatha jal chalni…anokhe sooch liye…badhai ke saath-

  3. ‘रात सुरंग
    सूरज लुढ़कता
    बाहर आया’
    -सुन्दर बिम्ब अनीता जी ! सभी हाइकु सुन्दर !
    हार्दिक बधाई !

    ‘मन में छल
    मटमैली सोच का
    गंदला जल ।’
    -सच बात! सभी हाइकु सुन्दर।
    हार्दिक बधाई सरस्वती जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. सभी हाइकु बहुत सुंदर आप दोनों को बधाई

  5. रात सुरंग
    सूरज लुढ़कता
    बाहर आया ।
    क्या बात है…|

    जल चलनी
    सागर लहरों से
    रेत छानती ।
    बहुत खूब…|

    आप दोनों को हार्दिक बधाई…|


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