Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 19, 2014

धारासार है धूप


डॉ.रंजना भालचंद्र अरगड़े

Dr.Ranjna Argade

Dr.Ranjna Argade

जन्म : 11 जनवरी , 1957

शिक्षा: एम. ए., पीएच.डी.

शोध :शमशेर बहादुर सिंह : एक अध्ययन       

सम्प्रति : प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हिन्दी विभाग,गुजरात विश्विद्यालय, अहमदाबाद

सेवा अवधि: 9 वर्ष व्याख्याता ,9 वर्ष रीडर, 11 वर्षों से प्रोफ़ेसर            

विशेषज्ञता : आधुनिक कविता, अनुवाद विज्ञान, तुलनात्मक साहित्य, काव्य-शास्त्र

          रंगमंच , हिन्दी , मराठी , गुजराती और अंग्रेज़ी  भाषाओं में लेखन ।

कृतियाँ :  कवियों का कवि शमशेर (आलोचना) ,भिनसारे में मधुमती ( सर्जनात्मक निबन्ध),सम्पादन : शमशेर जी के साहित्य का सम्पादन ,कवियों का कवि शमशेर (आलोचना )

अनुवाद:तत्वमसि-ध्रुव भट्ट (मराठी से अनुवाद)केन्द्रीय साहित्य अकादमी द्वारा  पुरस्कृत।गुजराती से हिन्दी – ज्ञानपीठ द्वारा सम्मानित उमाशंकर जोशी , पन्ना लाल पटेल, राजेन्द्र शाह की रचनाओं का मुख्यत:अनुवाद,मराठी से हिन्दी , मराठी से गुजराती अनेक रचनाओं का अनुवाद ।

सम्मान : वाणी पुरस्कार, माता कुसुम कुमारी सम्मान, राजा चक्रधर सृजन सम्मान    

ई-मेल            

argade_51@yahoo.co.in,

dr.ranjna_argade_50@yahoo.co.in

-0-

दस हाइकु

1

झूलते झूले

स्मृतियों में बच्चों के

ख़ुद–ब–ख़ुद

2

ऊँचा आकाश

तैरती है चील-सी

कल्पना मेरी ।

3

खाली घर

फैली -बिख़री चीज़ें

बुदबुदातीं ।

4

सन्नाटा फैला

धारासार है धूप

सड़कें खालीं ।

5    

कोई एक है

गहरे भीतर बसा

बेतकल्लुफ़।

6

रात कटती

नींद को खाती हुई

सुबह तक

7

झिलमिलाती

झाँकती है आँखों में

हँसी तुम्हारी ।

8

बन्द हैं आँखें

खुलती सपनों में

नींद में खोईं ।

9

कहर ढाती

मौत की पाती बन

धूप की अदा।

10

साँस भर है

ये पट ज़िन्दगी का

परछाई-सा॥

-0-

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Responses

  1. एक-एक हाइकु बेमिसाल है रंजना जी…..हार्दिक बधाई !

  2. उत्तम हाइकू रंजना जी, बहुत बहुत बधाई…

  3. सभी हाइकु उत्तम हैं। सुंदर सृजन के लिए डॉ. रंजना भालचंद्र अरगड़े को बधाई

  4. kahar dhati……………..
    vaah kya khoob hai
    badhaiyan sweekaren ranjana jee

  5. रंजना जी सभी हाइकु सुंदर हैं परन्तु कहर ढाती….बहुत अच्छा लगा |बधाई

  6. सभी सुंदर हाइकु अपने आप में विशेष संदेश दे रहें हैं .
    बधाई .
    नऐ व्यक्तित्त्व भाई हिमांशु जी बहन हरदीप जी ने आप को हम से जुड़वाया . उनका आभार .

  7. bahinji, atisundar haiku dil ko sukUn dete hain.
    badhAI v vinamr pranAm svikAren.

  8. एक अलग अनुभूति प्रदान करते सभी बहुत मोहक हाइकु हैं आदरणीया ….
    धूप की अदा ..और ..परछाईं सा ..बहुत बहुत अच्छे लगे ….हार्दिक बधाई ..सादर नमन !!

  9. सभी हाइकु अति सुन्‍दर । आप को हार्दिक बधाई।

  10. आप सभी की प्रतिक्रियाओं के लिए धन्यवाद। मन में साहस हुआ कि हाँ अब दुबारा लिखना आरंभ करूँ। इस समय मैं अपने हाइकु गुरु श्री आदित्य प्रताप सिंह को याद कर रही हूँ ,जिन्हेंने मुझे सन् 1976 में हाइकु लिखना सिखाया। साथ ही सिजो, ताँका भी सिखाया था।

  11. कोई एक है
    गहरे भीतर बसा
    बेतकल्लुफ़।

    रात कटती
    नींद को खाती हुई
    सुबह तक |

    क्या बात है…बहुत खूब…| हार्दिक बधाई…|


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