Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 19, 2014

आकार जिन्दगी के


रिता1-रीता महर्जन

 1

मीठा- सा दर्द

यादों के नश्तर सें

कटके निकला ।

2

काग की काँ-काँ

सुनके मन सुवह

पसीज गया ।

3

यूँ ही अकेले

कितना होगा मजा

काँटे बो लिये ।

4

धुंध लिपटे

आकार जिन्दगी के

दिखते नहीं ।

5

नभ निर्मल

परिवेश स्वच्छन्द

उत्फुल्ल मन

6

दिखती है क्यों

तेरी नैन -हँसी में

व्यथा की कथा

7

इक झलक

उम्मीद देखने की

मचला मन

       -0-

आनन्द जोशी 2-डा. आनन्द जोशी    

1

देय् ब्यस्त युद्घय्

ब्वाँय् जुल ट्यांक बुँइ

भ्रूणया हत्या

0

देश युद्ध में

योद्धा दौड़े खेत में

भूण की हत्या ।

2

कुरुप सल्ला

बलात्कृत जीवन

शोषित बिम्व ।

0

कुरूप वृक्ष

बलात्कृत जीवन

शोषित बिम्ब ।

3

संत्रस्तझंग

प्रदूषित ताल, लः

अस्तित्ववोध ।

0

संत्रस्त पंछी

दूषित ताल, जल

अस्तित्व मिटा ।

4

प्लास्टिकया स्वाँ

कोथाया कुने कुने

ऋतु वेँ चाल ।

0

प्लास्टिक ढेर

कमरे के किनारे

ऋतु हैरान।

5

ताल्लाया निभाः

जलचरत त्रस्त

हाथ्याम्वायेत ।

0

गर्मी की धूप

जलचर भी त्रस्त

जीना चुनौती ।

6

बन्दख्युँक्वथाय्

जि लिप्णतदुने बन्द

प्रविधिया पन्जाय् ।

0

बन्द अँधेरे

लिफ्ट में बन्द हुए

प्रविधि-पाश।

-0-

  ( इन नेपाली हाइकु का अनुवाद श्री इन्द्र माली जी के सौजन्य से प्राप्त हुआ)

 

         


Responses

  1. yon hi akele ,kitna hoga maza, kaante bo liye.v band andhere ,lift mein band hue, prvidhi – pash. saty ujagar karti panktiyan .joshi ji,v rita ji ko badhai. shri mali ji ko dhanybad jinke saujany se itni sunder rachnaen padh saki.
    pushpa mehra..

  2. वास्तविकता को प्रकट करते सभी उम्दा हाइकु आन्नद जी, रिता जी…..बहुत-२ बधाई एवं इन्द्र माली जी का हार्दिक धन्यवाद !

  3. दिखती है क्यों
    तेरी नैन -हँसी में
    व्यथा की कथा

    बहुत सुंदर।रीता महर्जन जी बधाई !

    डा. आनन्द जोशी, श्री इन्द्र माली जी को भी बधाई !

  4. दिखती है क्यों ………..
    आज के दौर के हरेक इंसान की उथली हंसी में छिपे दर्द को कितनी खूबसूरती से उकेरा है
    बधाइयाँ सुन्दर

    बंद अँधेरे………………
    बहुत बढ़िया लिखा है………..बधाइयाँ दोनों रचनाकारों को.
    डॉ. कविता भट्ट

  5. रीता जी और आनंद जी आप दोनो को हार्दिक बधाई |भाव भरे हाइकु लिखने के लिए |

  6. इक झलक
    उम्मीद देखने की
    मचला मन .

    यह विशेष लगा , सभी मोहक हैं रीता जी बधाई
    आनंद जी बहुत सुंदर शब्द चित्रण के साथ सुदर हाइकु बिम्ब .
    हार्दिक बधाई .

  7. सभी सुन्दर हाइकु …

    इक झलक ..और …बंद अँधेरे …बहुत अच्छे लगे ..

    रिता जी एवं आनंद जी को बहुत बहुत बधाई !

  8. रिता महर्जन और डॉ आनन्द जोशी जी के हाइकु बहुत अच्छे हैं । आशा है यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी ।रिता जी का यह हाइकु मन को छू गया-दिखती है क्यों
    तेरी नैन -हँसी में
    व्यथा की कथा
    जोशी जी के सभी हाइकु में आज का कटु यथार्थ चित्रित है।

  9. बहुत सार्थक और सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई…|


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