Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 17, 2014

पिता का प्यार


 मंजु गुप्ता

 

1.

प्राणाधार  हैं 

संतति के नींव  की 

पिता महान |

2.

पिता वृक्ष – से 

पतझड़ी धूप  में

 दें ठंडी छाया |

3.

पंख लगाए 

स्वप्न उड़ानों पर 

पिता का प्यार |

4.

 पिता की पीठ 

बन के  घोडागाड़ी

शैशव खेला |

5.

बिन पिता के 

जीवन लगे भार 

जीना दुश्वार |

 


Responses

  1. PITA KE PRATI PREM DARSHATE HUAE BADE HI MARMIK HAIKU….BADHAI KE SAATH-

  2. पंख लगाए
    स्वप्न उड़ानों पर
    पिता का प्यार |

    यह सत्‍य है । मंजु गुप्‍ता जी हार्दिक बधाई।

  3. pita vrex se, pataghari dhup me.n , dein thndi chhaya. bilkul thik likha hai.
    iske sath annya haiku bhi bahut achhe likhe hain.manju ji apko badhai.
    pushpa mehra .

  4. पिता को समर्पित ,आदर भरी भावनाओं को व्यक्त करते बहुत सुन्दर हाइकु …बहुत बधाई मंजु जी !!

  5. वाह ! मंजु जी, पिता के हर रूप को ओने हाइकु में बांधा है आपने |पिता वृक्ष – से
    पतझड़ी धूप में
    दें ठंडी छाया |
    यह तो विशेष मनभाया | बधाई आपको |

  6. आदरणीय सभी समालोचको का हार्दिक आभार .


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