Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 14, 2014

नम हैं नैन


 

गुंजन गर्ग अग्रवाल

1

नम हैं नैन

जो हर एक आँसू

पूछते प्रश्न ।

2

सूखते अश्रु

पथरीले नयन

पुत्र- वियोग ।

3

ख्वाब देखती

दर-दर भटकी

बूढ़ी अँखियाँ ।

4

दूर सपने

तलाशते ही रहे

खुद अपने ।

5

आस की प्यास

अहसास है खास

दिल उदास ।

6

टूटते ख्वाब

मन हुआ उदास

गैर ही तो थे

7

मेरी या तेरी

कही या अनकही

रही अधूरी ।

8

पाप का ताप

अंर्तमन जलता

होता विनाश ।

9

कुंठित बुद्धि

पराधीन मनुष्य

खोया विवेक ।

10

तृष्णा अपार

बन गया व्यापार

प्रीत संसार ।

-0-

 

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Responses

  1. मेरी या तेरी
    कही या अनकही
    रही अधूरी

    बहुत सुंदर। अन्य हाइकु भी अच्छे लगे। बधाई गुंजन जी !

  2. udaasi mein lipte par katu saty ke saath pyre haiku hai apke gunjanji ….badhai

  3. बहुत भावप्रवण हाइकु ..बधाई गुंजन जी !!

  4. gunjan ji apake sabhi haiku bahut achhe likhe hain. badhai.
    pushpa mehra.

  5. बहुत बहुत आभार आदरनीय सुशीला जी ,पुस्प्मेहरा जी, ज्योत्स्ना शर्मा जी,ज्योत्स्ना प्रदीप जी
    मेरे हाइकू को पसंद करने और मेरा उत्साहवर्धन के लिए बहुत आभारी हूँ 🙂

  6. गुंजन जी ,भाव प्रवाहित हाइकु लिखे हैं |बधाई |

  7. ख्वाब देखती
    दर-दर भटकी
    बूढ़ी अँखियाँ ।
    मार्मिक…|
    सभी हाइकु बहुत अच्छे हैं…बधाई…|


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