Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 30, 2014

अपना कोई ।


 डॉ. कुँवर दिनेश सिंह

 1

सपना कोई

चंदा की सूरत में

अपना कोई ।

12

छैल चिनार

रंग बदल रहा

ऋतु विचार ।

3

अकेला पेड़

घर की दीवार से

सटा है पेड़ ।

4

बर्फ़ के फाहे

आसमानी नेमत

मन सराहे ।

5

रुत फाल्गुनी

धरा की जिजीविषा

बढ़ी चौगुनी ।

6

राह एकांत

पथिक को जोहती

हुई अशान्त ।

7

समता– भरी

आकाश की आँखें हैं

ममता भरी ।

8

कोहरा छाए

स्वागत में आकाश

बाहें फैलाए ।

9

आती है पौन

दर को खटकाती

रहती मौन ।

10

नार अकेली

छेड़ती बार -बार

हवा सहेली  ।

11

डगर सूनी

जी बहलाने आई

हवा बातूनी ।

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Responses

  1. डगर सूनी
    जी बहलाने आई
    हवा बातूनी ।
    बहुत सुन्दर…बधाई…|

  2. नार अकेली
    छेड़ती बार -बार
    हवा सहेली ।
    11
    डगर सूनी
    जी बहलाने आई
    हवा बातूनी

    सभी हाइकु लय ताल लिए । हार्दिक बधाई

  3. बहुत ही सुंदर हाइकु ।

  4. दिनेश जी हाइकु १० बहुत सुंदर लगा बधाई |

  5. सभी मनमोहक हाइकु…..बधाई !

  6. bhaavpurn haiku

  7. dagar suni, ji bahalane ai ,hava batuni.isake sath dusare haiku bhi bahut sunder hain. badhai.
    pushpa mehra.

  8. सभी हाइकु अर्थपूर्ण । आप को बधाई।

  9. बहुत सुन्दर…बधाई…|

  10. डगर सूनी
    जी बहलाने आई
    हवा बातूनी ।

    bahut kub!


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