Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 25, 2014

बंद हैं द्वार


1-पुष्पा मेहरा

1

बंद हैं   द्वार

दर्द भरी चीख़ें हैं

मौन हैं हम ।

2

उदास मन

जीवन- तट बैठा

आँखें बिछाए ।

3

 मन का खेत

 छली बाज़ ताकता

 रक्षित कौन !

4

 सूख गया है

 सारी झीलों का पानी

 बैठे हैं प्यासे ।

5

 फँसे  हैं हम

रोशनी  के तल में

शुष्क रेत में ।

6

घना अँधेरा

परदेसी हैं सब

थके हैं पग  ।

-0-

2-देवी नागरानी

1

सिले हुए हैं

समंदर के होंठ

बादल मौन ।

2

निश्चल नभ

उन्मुक्त सी पवन

मुस्काई धूप ।

3

उड़ते पत्ते

सुनसान उदास

शाम की हवा  ।

4

वीरान शाम

सुर-साज़-ताल के

बीच उदास।

5

मन ही मन

ये रेत के महल

बने-बिगड़े ।

-0-

3-गुंजन गर्ग अग्रवाल

1

डूबती कश्ती

हो समय का साथ

तैर जाती है

2

दिल में गम

वक़्त ने दिया धोखा

बिखरे हम

3

लगा अपना

वक़्त ने बता दिया

गैर था वह

4

बिखेर दिया

वक़्त के तूफानों ने

ख्वाबों का किला

5

नैना बरसे

मन मेरा तरसे

बिन तुम्हारे  

6

पिया है दूर

मन उदास आज

बैचैन आँखें

7

यादों की धुंध

परछाई सी होती

आकर जाती

8

ख़ुशी का पल

रहे रिश्तों में प्यार

सदियों तक

9

उदास मन

खोजे ख़ुशी का पता

है छुपी कहाँ

10

खाया जो धोखा

दरिया बने नैन

रोके न रुके ।

-0-

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Responses

  1. sabhi haiku umda … pushpa ji devi naagraani hi gunjan .. aap sabhi ko haardik badhayi shubhkamnaye 🙂

  2. पुष्पा जी सुंदर हाइकु रचने के लिए बधाई विशेषकर मन का खेत छली बाज़ तकता रक्षित कौन |बहुत अच्छा लगा |
    सविता अग्रवाल “सवि”

  3. shukriya sunita di n savita agarwal ji
    badhaayi pushpa ji n naagraani ji ..sundar haiku ke liye .

  4. veeran sham ,sur -tal- saj ke, beech udas.bikher diya, vakht ke tufhanon ne,khvabon ka kila.devi nagrani ji va gunjan ji ap dono ke haiku padhe bahut sunderlikhe hain.badhai.
    pushpa mehra.

  5. पुष्पा मेहरा जी, गुंजन जी, देवी नागरानी जी उमदा हाइकुओं के लिए बहुत बधाई !

  6. जीवन के विविध रंग बिखेरते सुंदर हाइकु
    आप सभी को बधाई .

  7. सभी हाइकु उदास-उदास से… मगर बहुत ही सुन्दर ! उदासी की ख़ूबसूरती की चमक कुछ अलग ही होती है !
    आ. पुष्पा जी, देवी नागरानी जी एवं गुंजन जी आप सभी को हार्दिक बधाई!

    ~सादर
    अनिता ललित

  8. बंद हैं द्वार
    दर्द भरी चीख़ें हैं
    मौन हैं हम ।
    बेचारगी की दास्तां…|

    उड़ते पत्ते
    सुनसान उदास
    शाम की हवा ।
    मर्मस्पर्शी…|

    खाया जो धोखा
    दरिया बने नैन
    रोके न रुके ।
    जीवन की सच्चाई…|

    आप तीनो को हार्दिक बधाई…|

  9. sabhi sunder haiku ke liye badhai

  10. उदास मन
    जीवन- तट बैठा
    आँखें बिछाए ।

    मन ही मन
    ये रेत के महल
    बने-बिगड़े ।

    खाया जो धोखा
    दरिया बने नैन
    रोके न रुके ।
    rachana

  11. sabhi sunder hain pr yo haiku bahut hi achchhe lage

  12. sabhi haiku bahut hi khoobsurat lage …aap logo ko dhero badhai


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