Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 11, 2014

माँ की दुआएँ


1-रचना श्रीवास्तव
माँ-11
माँ की दुआएँ
पोछने आयीं आँसू
रूमाल बन ।
2
बोलती नहीं
तस्वीर बन गई
अब माँ मेरी ।
3
छोड़ किनारे
आशीष की पोटली
चली गयी माँ।
4
कैसे हो बेटे
तस्वीर में मुस्काती
पूछती है माँ।
5
सूना है घर
सूख गयी तुलसी
माँ जो नहीं है ।
6
कोई न कहे –
‘कब आओगे घ’
माँ के सिवाय ।
-0-
2-कृष्णा वर्मा
1
मातृ- दिवस
माँ तेरी स्मृतियों से
नैना सजल ।
2
माँ याद आए
बालों में अँगुली जो
हवा फिराए ।
3
वैद अचूक
सीने से लगाके माँ
निवारे हूक ।
4
रोम भी खिले
सपने में भी गले
माँ -बेटी मिलें ।
5
महा उदार
जीवन -रथ हाँके
माँ तू निस्वार्थ ।
6
लगतीं सूनी
दिल की गलियाँ माँ
तेरे बगैर ।
माँ-27
तू तो फरिश्ता
विस्मय है तुझसा
दूजा ना रिश्ता ।
8
बंजारा मन
दुख-सुख में खोजे
माँ को क्षण-२ ।
9
माँ तेरा साथ
संख्यातीत रूपों में
करूँ मैं याद ।
10
कभी ना थकी
विपत्तियों में खटी
फिर भी हँसी ।
11
तू क्या गई माँ
उम्र का पायदान
लगा दीखने ।
-0-
3-सविता अग्रवाल ‘सवि’
माँ-31
माँ का सम्मान
कष्टों से होती मुक्ति
बने महान ।

बाँधती गाँठ
प्यार के बंधन की
बनकर माँ ।
3
टूटे सम्बन्ध
सीती ही रहती माँ
जीवन भर ।

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Responses

  1. सुन्दर भावपूर्ण हाइकु के लिए रचना जी, कृष्णा जी, एवं सविता जी को बहुत बहुत बधाई!!
    हिन्दी हाइकु परिवार को मातृदिवस की शुभकामनाएँ !!

  2. chhod kinare,ashiish ki potali, chali gai maa. bahut hi bhavpurn haiku hai.banjara man,dukh- sukh men khoje,ma – xan-xan. tute sambandh , siitii rahati man jeevan bhar.rachana ji ,krishna ji ,savita ji uprokt haku ke sath apake anya haiku bhi bhavpurn hain.badhai.
    pushpa mehra.

  3. aap logo ke haiku padhkar aankhe nam ho gaie …..bahut hi bhaav purn haiku….khoobsurti ke saath….matr divas ki badhai…rachnaji,savi ji ,krishna ji ka aabhar. bhaavo mein hame bhi baandhne ke liye

  4. bahut hI bhAv bhare haiku. sabhI ko pranAm.

  5. सभी हाइकु अद्वितीय हैं
    कृष्णा वर्मा, रचना श्रीवास्तव, सविता अग्रवाल ‘सवि जी बधाई

  6. हर हाइकु माँ के सन्दर रूप,स्वभाव को उजागर करता….. उत्कृष्ट अभिव्यक्ति !
    रचना जी, कृष्णा जी, सविता जी आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ !

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. माँ की दुआएँ
    पोछने आयीं आँसू
    रूमाल बन ।

    कैसे हो बेटे
    तस्वीर में मुस्काती
    पूछती है माँ।

    माँ याद आए
    बालों में अँगुली जो
    हवा फिराए ।

    Mere man men ghar kar gaye ye haiku , mere rongte khade ho gaye padhkar,meri hardik badhai ….

  8. माँ की दुआएँ
    पोछने आयीं आँसू
    रूमाल बन ।

    माँ याद आए
    बालों में अँगुली जो
    हवा फिराए ।

    निर्जीव वस्तुओं में भी माँ का प्यार झलकता है…|

    टूटे सम्बन्ध
    सीती ही रहती माँ
    जीवन भर ।
    माँ यु ही अपने बच्चों के रिश्ते संभालती है…|
    बहुत भावपूर्ण हाइकु हैं…बधाई…|


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