Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 10, 2014

पानी काँपा है


डॉ सतीशराज पुष्करणा

काँपता पानी1

प्यास जो लगी

बूँदे पल भर में

हो गई नदी ।

2

रात है काली

चलो जलाएँ दीये

लिखें-दिवाली ।

3

खारा पानी पी

नभ ने बरसाया

पानी मीठा ही ।

4

बच्चों की खुश

ऐसा  लगा- जैसे कि

प्रकृति हँसी ।

5

मिटी थकान

देखकर बच्चे की

शुभ्र मुस्कान ।

6

नदी जो सूखी

तटों की खाई बढ़ी

आदमी जैसी  ।

7

कटे न दिन

महँगाई की मार-

चुभते पिन ।

8

पानी काँपा है

कोई प्यासा खड़ा है

नदी-तट पे ।

9

सभी जाएँगे

पर कुछ यादों में

हम  पाएँगे ।

10

उनका आना-

सँभली नहीं खुशी

आँखें छलकीं।

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Responses

  1. sabhi haiku achhe lge ….bdhai …

  2. satish ji kamaal ke haiku likhe hai aapne ..har haiku ek kahani kahta hai…kisi mein peeda to kisi mein sukh ka sajeev sandesh……naman hai aapki sooch ko……badhai

  3. सुख-दुःख के सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करते हुए… सभी हाइकु बहुत सुन्दर… आदरणीय सर !
    हार्दिक शुभकामनाएँ आपको !

    सादर
    अनिता ललित

  4. बहुत गहरा अर्थ लिए हाइकु | आभार आपका |

    शशि पाधा

  5. खारा पानी पी
    नभ ने बरसाया
    पानी मीठा ही
    दूसरों का भला सोचने-करने वाले ऐसा ही करते हैं…|
    गहन भावों से सजे हाइकु के लिए हार्दिक बधाई…|


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