Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 10, 2014

अनुभव


सुभाष लखेड़ा

किताबें

1

किताबी बातें

मन तो बहलाएँ

काम न आएँ।

2

याद कीजिए

कितने जख्म दिए

कितने सीए। 

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Responses

  1. vaah subhash bhaisahib vaah……yaad kijiye kitne zakham diye kitne siye……..kitne marmik sachchaie hai is haiku mein …..tahe dil se badhaie………

  2. subhash bhai ji haiku ke madhyam se apake dono kathan purn satya hain. apako hardik badhai.
    dusare haiku ko dhyan mei rakh mai kahana chahati hun– dekha to paya,zakhm sile hi na the ,sare the khule.
    pushpa mehra.

  3. सिर्फ दो हाइकु हैं… मगर पूरी कहानी कह दी ! अति सुन्दर अभिव्यक्ति !
    हार्दिक बधाई सुभाष लखेड़ा जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. sir, bahut khoob…
    badhAI.

  5. सुन्दर प्रेरक भाव | बधाई आपको |

  6. याद कीजिए
    कितने जख्म दिए
    कितने सीए।
    अगर लोग ऐसे आत्म-मंथन कर ले तो ये दुनिया कितनी अच्छी हो जाए |
    सार्थक हाइकु…बधाई…|

  7. सुन्दर और प्रेरक शब्दों के लिए तहे दिल से आप सभी को हार्दिक धन्यवाद ! – सुभाष लखेड़ा


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