Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 9, 2014

बूँदों का साज़


हरकीरत हीर

1

रिमझिम -सी

सावन सी  फुहार

छाया ख़ुमार

2

बदला आज

मौसम का मिज़ाज

क्या छुपा राज़ ?

3

भीगी धरती

मस्ती में सराबोर

मौसम हुआ

4

पछुआ हवा

चली ठंडी ,चंचल

ये मन हुआ

5

ये बरसात

छेड़े बूँदों का साज़

महकी रात

6

झूमे दरख़्त

भीगा पत्तों का गात

हँसीं है रात ।

7

खिल के हँसे

 मुरझाये से पात

कोंपल गात

8

ले अंगड़ाई

दादुर भी निकले

छेड़ा है राग

9

न-न्हा  सा बीज

छतरी  ले के आया

खिल मुस्काया

10

मेघा जो आ

पंख फैला नहा

चिड़िया गा

11

इंद्र जो झूमे

गाये मेघा मल्हार

छाई बहार ।

12

चली है नाव

वर्षा की  बूँदों संग

नानी के गाँव

-0-

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Responses

  1. चली है नाव
    वर्षा की बूँदों संग
    नानी के गाँव
    -0-
    इस हाइकू ने बचपन याद करा दिया
    सभी लजवाब हैं
    बधाई

  2. harkeerat ji…sach kaha hai manju ji ne aap hame aaj hamare bachpan se mila laie hai ….shukriya….aur badhai bhi

  3. वर्षा ऋतु का बहुत सुन्दर चित्रण ! हीर जी…. आपकी रचनाएँ हमेशा ही अपनी तरफ खींचतीं हैं , इस बार ज़रा हट कर हैं। पढ़कर बहुत अच्छा लगा।

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. bAl man ko chUtA haiku
    “chali hai nAv
    varshA kI bUndon sang
    nAnI ke gAnv.”
    bahut hI umdA lagA.
    bahinji badhAI. pranAm.

  5. Bahut khub!

  6. न-न्हा सा बीज
    छतरी ले के आया
    खिल मुस्काया ।
    बहुत प्यारा सा चित्रण…बधाई इन सुन्दर हाइकु के लिए…|


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