Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 9, 2014

गर्म हवाएँ


सुदर्शन रत्नाकर
1
भीषण गर्मी
तरसते पानी को
व्याकुल पक्षी ।
2
उमस भरी
गर्मी की रितु आई
नहीं सुहाई ।
3
लू के थपेड़े
बदन झुलसायें
चैन न आए।
4
गर्म हवाएँ
जलते तन मन
करें क्रन्दन ।
5
लम्बे हैं दिन
तेरे बिन साजन
कटते नहीं ।
6
आँधियाँ चलीं
उड़ा कर ले गईं
घर पक्षी के ।
7
सही न जाए
तपती दोपहरी
बिन छाया के ।
8
ख़ामोशी छाई
मौन हैं हवाएँ भी
थकी थकी -सी ।
9
कैसा है मौसम
न जीवन, न प्राण
अटकी जान ।
10
तपता सूर्य
उदास है धरती
सोई हो जैसे ।
11
सूखते पत्ते
बिन पानी तरसें
नहीं सरसें ।
-0-

 

 

Advertisements

Responses

  1. meri hardik badhai sabhi haiku khubsurat hain…

  2. गर्मी का चलचित्र खिंच दिया .
    सुंदर हाइकु
    बधाई

  3. बहुत सुन्दर हाइकु….बधाई !

  4. सभी हाइकु खूबसूरत…..बधाई !

  5. garmi par sateek v sunder haiku….badhai

  6. आ. सुदर्शन रत्नाकर दीदी जी गर्मी और लू से तपते मौसम का क्या खूब चित्रण किया आपने ! अतिसुन्दर !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. sabhI mArmik haiku.
    badhAI svikAren.

  8. सही न जाए
    तपती दोपहरी
    बिन छाया के ।
    गर्मी के इस तपते मौसम का बेहद सटीक चित्रण करते इन हाइकु के लिए बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: