Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 6, 2014

ऊँघता कुआँ


गर्मी- भावना कुँअर

well1

गर्मी जो आई

धूप लेती जम्हाई

लू अलसाई।

2

पसीने भीगे

कलियों के चेहरे

लूएँ हैं छेड़े।

3

ये दुपहरी

बतियाती फिरती

क्यों न थकती।

4

पगडंडियाँ

हैं अलसाई पड़ी

जिद्दी हैं बड़ी।

5

क्या कर जाएँ

सिरफिरी हवाएँ

कैसे बताएँ।

6

ऊँघता कुआँ

जून की दुपहरी

लुएँ प्रहरी।

 

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Responses

  1. गरमी का बढ़िया चित्रण !

    ऊँघता कुआँ
    जून की दुपहरी
    लुएँ प्रहरी।………बहुत सुन्दर हाइकु…..भावना जी बधाई !

  2. भावना कुँअर जी, आपके लिखे ” पसंद आये / गरमी के हाइकु / मन को भाये। ” आपको हार्दिक बधाई।

  3. sundar haiku

  4. भावना जी आपके हाइकु की तो मैं जबरदस्‍त फैन हूँ क्‍या लिखती हैं आप

    गर्मी जो आई/धूप लेती जम्हाई/लू अलसाई।

    क्या कर जाएँ/सिरफिरी हवाएँ/कैसे बताएँ।

    कमाल की लय है प्रत्‍येक हाइकु में । हार्दिक हार्दिक बधाई।

  5. गर्मी में धूप ,हवा ,पगडंडियाँ सभी की प्रकृति पर सुन्दर सशक्त हाइकु …
    बहुत सूक्ष्म पर्यवेक्षण और अभिव्यक्ति होती है भावना जी की …हार्दिक बधाई !!

  6. kya kar jayen, sirphiri havayen,kaise batayen.isake sath hi sabhi haiku bahut achhe likhe hain hardik badhai.
    pushpa mehra.

  7. धूप , कलियाँ, पगडंडियाँ , कुँए सभी के लिए बहुत सुन्दर बिम्बों का उपयोग किया है। इतनी ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति के लिए ह्रदय से आपको बधाई भावना कुँवर जी।

    ~सादर
    अनिता ललित

  8. bahut hi khoobsurat abhivyakti ……garmi ka
    sashakt chitran anokha andaz liye…badhai bhawnaji

  9. हाइकु गर्मी
    के दे रहें ठंडक
    सारे जहां को .

    बहुत सुंदर मनोभाव
    बधाई

  10. garmI ke haiku man ko bhAye. bahinji badhAI.

  11. ऊँघता कुआँ
    जून की दुपहरी
    लुएँ प्रहरी।
    Bahut hi sargabhit haiku gar I par…..umda

  12. ऊँघता कुआँ
    जून की दुपहरी
    लुएँ प्रहरी

    bhut sundar abhivyakti ! garmi ka sundar chitran !!

  13. 1
    ऊँघता कुआँ

    जून की दुपहरी

    लुएँ प्रहरी।
    2
    क्या कर जाएँ

    सिरफिरी हवाएँ

    कैसे बताएँ।
    बहुत ही सुंदर बिम्ब गर्मी में ठंडक दे गए भावना जी !

  14. Aap sabhi ka tahe dil se aabhar aajkal svasty theek na hone ke kaarn idhar aana nahi hota maaf kijiyega savasth hote hi fir se vahi likhna padhna hoga …tab tak ke liye maafi,,,

  15. बहुत सुन्दर हाइकु हैं…ये तो बहुत अच्छा लगा…
    ऊँघता कुआँ
    जून की दुपहरी
    लुएँ प्रहरी।
    हार्दिक बधाई…|


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