Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 1, 2014

आधी आबादी का आकाश : एक विस्तार !!


आधी आबादी का आकाश : एक विस्तार !!

4-Aadhi_Aabadi..डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

          जापान से भारत आया नन्हा हाइकु आज भारतीय साहित्यकारों के लाड़-प्यार से परिपोषित हो सुन्दर सशक्त काव्य-विधा के रूप में परिलक्षित होता है।डॉ. सत्यभूषण वर्मा , डॉ. भगवत शरण अग्रवाल , डॉ. सुधा गुप्ता , श्री नलिनीकांत जी , श्री रमाकांत श्रीवास्तव जैसे वरिष्ठ रचनाकारों ने अपने एवं अन्य सहवर्ती रचनाकारों के प्रयासों से हाइकु को एक सुदृढ़ आधार प्रदान किया।जिसके परिणाम स्वरूप भाषा एवं शिल्प-गत सौष्ठव लिए विविध हाइकु-संग्रह एवं संकलन समय-समय पर प्रकाशित हुए ।अब यदि महिला हाइकुकारों की ही बात की जाए तो डॉ.सुधा गुप्ता ,डॉ.शैल रस्तोगी, सावित्री डागा , शैल सक्सेना , डॉ. उर्मिला अग्रवाल ,उर्मिला कौल प्रभृति कवयित्रियों ने अपने अजस्र प्रयासों से हिंदी-साहित्य-मंदिर में हाइकु की प्राण प्रतिष्ठा की।

रामेश्वर काम्बोज हिमांशु एवं डॉ हरदीप कौर सन्धु के सहयोग से अंतर्जाल पर संचालित हिन्दी हाइकु ब्लॉग ने हाइकु को और भी अधिक लोकप्रिय बनाया। अनवरत चलती हाइकु यात्रा में नित नए हाइकुकार विशेषतः महिला हाइकुकार सहयात्री हुए।परिणामतः सम्पादन एवं संकलन के साथ-साथ महिला हाइकुकारों का हाइकु-सृजन एकल हाइकु-संग्रह के रूप में भी सामने आया। वर्तमान समय में डॉ भावना कुँअर के दो एकल हाइकु संग्रह तारों की चूनर तथा धूप के खरगोश , डॉ. हरदीप सन्धु काख़्वाबों की ख़ुशबू और रचना श्रीवास्तव काभोर की  मुस्कान,रेखा रोहतगी का मन मुखिया , डॉ उर्मिला अग्रवाल का भोर आसपास हैअपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे।

सम्प्रति सम्पादन की परम्परा के निर्वहन में सुश्री रचना श्रीवास्तव एवं डॉ. अनिता कपूर जी के संपादकत्व में आधी आबादी का आकाशविश्व की चुनिंदा 62 महिला हाइकुकारों के हाइकुओं का अनुपम संग्रह है।जिसके विषय में चर्चा यहाँ मंतव्य है।वस्तुतः पुस्तक में हाइकुकारों ने मानव-जगत की अंतर प्रकृति एवं बाह्य प्रकृति का सूक्ष्म और प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया है।एक ओर हरी-भरी धरती तो वृक्ष-विहीन होती धरती भी ,पुष्प ,कलियाँ ,साँझ ,रात ,चाँद ,सूरज ,वर्षा ,शैल ,निर्झर ,नदियाँ और सागर…विशद है उनकी काव्य-भूमि का रचना संसार।नन्हे हाइकु ने इन सबको अपने छोटे से कलेवर में समेट लिया और कवयित्रियों की सशक्त लेखनी ने हाइकु के माध्यम से बहुत सुन्दर बिम्ब साकार किए।कुछ उदाहरण दृष्टव्य हैं

कुनमुनाया / बादल के कंधे पे / उनींदा चाँद …डॉ सुधा गुप्ता

बैठे मूढ़े पे / गुडगुडाते हुक्का / बाबा जी मेघ …डॉ शैल रस्तोगी

ओढ़ा दुकूल / श्याम-वर्णी मेघों का / गिरि शृंगों ने …डॉ उर्मिला अग्रवाल

तितली दल / खोल डाले किसने / रंगों के नल … डॉ भावना कुँअर

ऊँचा पर्वत /नीली अँखियों वाली / झील निहारे …डॉ. हरदीप कौर सन्धु

अठखेलियाँ / मिलीं ज्यों सहेलियां / सिन्धु लहरें … सुदर्शन रत्नाकर

वर्षा पहने /बूंदों-सजा लहँगा /मटक चले … रचना श्रीवास्तव

टेसू चूनर / अरहर पायल / वन दुल्हन … पूर्णिमा वर्मन

शाम सुरसा / निगल गई गोला /सूरज वाला … डॉ. अनिता कपूर

आतप हास / कुंदन सा शोभित / अमलतास … शशि पाधा

प्रेम रंग ले / शोख गुलमोहर / खड़ा मुस्काए … पुष्पा मेहरा

चाँद चढ़ा है / अम्बर के आँगन /अम्मा काते रे …प्रो. दविन्दर कौर सिद्धू

पत्तों पे बैठे / बारिश के मनके / जड़ा है हीरा …शशि पुरवार

ओस भीगी पत्तियाँ  देख हरकीरत हीर कहती हैं ..

रोया ये कौन / पत्तों पे हैं लिपटी / दर्द की बूँदें .

उर्मिला कौल जी ने एक बिम्ब प्रस्तुत किया …

उकडूँ बैठी / शर्मसार पहाड़ी /ढूँढती साड़ी . ..और ..अनुपमा त्रिपाठी का आशा से भरा सन्देश है ..

खिली लालिमा / देती अब सन्देश /मिटी कालिमा .

ऐसे अनेक दृश्य हैं जो बहुत सुन्दरता से साकार हुए परन्तु सभी को यहाँ कहा जाना संभव नहीं।दूसरी ओर मानव मन की संवेदनाओं को उकेरने में भी इन रचनाकारों की कलम पूर्णतः समर्थ है।प्रेम मन की पावन अनुभूति है जो जीवन को उजालों ही उजालों से भर देती है

तू मेरे पास / रौशनी में नहाई / ये काइनात … रेखा रोहतगी

चाँद ने छुआ / सागर-सा धीर भी / अधीर हुआ … डॉ मधु चतुर्वेदी

खुले कपाट / अंतस् की चेतना के / फैला उजास …कमला निखुर्पा

प्रेम बंधन /न रस्सी न साँकल/ पर अटूट … डॉ. जेन्नी शबनम

पलकें उठीं / प्रेम के कई गीत / मचल गए … नमिता राकेश

मौन प्रणय / पारस बन जाता / दिव्यता पाता ..मंजुल भटनागर

दूसरी ओर वृद्ध माता-पिता ,टूटते-दरकते रिश्ते ,सामाजिक विसंगतियां ,नारी-विमर्श ,भूख , दर्द ,भ्रष्टाचार ,पौराणिक आख्यान ,राजनीति और जीवन के शाश्वत सत्यों को बखूबी कहा गया है।उदाहरण देखिए

दो बूढी आँखें / सबसे दूर सोंचें / काश हो पाँखें … डॉ. मधु चतुर्वेदी

विदेशी परी / संकीर्ण परिवार /मन तड़पे …डॉ.सुधा ओम ढींगरा

पुष्प में बसी / रस गंध मादक / तितली फंसी … डॉ. मीना अग्रवाल

जीवन बीता / वो कभी बनी राधा / तो कभी सीता ….. ज्योत्स्ना प्रदीप

प्राण-बेटियाँ / घरौंदे ये बसाएँ / लोभी जलाएँ …मुमताज टी.एच. खान

चूल्हा तो ठंडा / भूखे बच्चे के पेट / आग जलती … प्रियंका गुप्ता

सोन चिरैया /भूखी प्यासी लुटी सी / सोना विदेश … ज्योतिर्मयी पन्त

रौंदी धरती / भूले हैं परिणाम /अब हैरान … सीमा स्मृति

खिलौने नहीं / सीने से लगा लो माँ / खिल उठूँगा … सुशीला श्योराण

चुभती रही / कील जैसी मन में / अधूरी आस …मंजु मिश्रा

रोटी का ग्रास / गरीब की आँखों में / जगाए आस … डॉ. लाज मेहता

कैसी ये हवा / जो उड़ा दे,सुखाए / रिश्तों की नमी … अनिता ललित

चौंका देता है /कोई खुल के हँसे /आज के दौर में … कृष्णा वर्मा

खाली है नीड़ / अश्रुप्लावित मन / लुप्त जीवन …भावना सक्सैना

सच कहके /दुःख सहके हम / जिन्दा क्या कम … जया नर्गिस

गूँथीं थी माला / महकी हथेलियाँ /अनायास ही …शैल सक्सेना

वस्तुतः व्यापक विषयों का स्पर्श करती लेखनी ने विशद संसार का सृजन किया।कहना न होगा कि चयनित सभी हाइकुकार एक से बढ़कर एक हैं और बहुत कुछ स्वयं पुस्तक पढ़कर आस्वादन किए जाने योग्य शेष है। ऐसे सशक्त लेखन के लिए सभी हाइकुकार तथा सारगर्भित ,सुन्दर चयन हेतु संपादिका-द्वय बहुत-बहुत साधुवाद की पात्र हैं।आशा करती हूँ यह ‘आधी आबादी का आकाश ‘ साहित्य जगत में और अधिक विस्तार तथा ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।

आधी आबादी का आकाश ( हाइकु-संग्रह); सम्पादक : डॉ. अनिता कपूर ,रचना श्रीवास्तव , प्रकाशक:अयन प्रकाशन:1/20,महरौली ,नई दिल्ली 110 030 ; मूल्य : 200 रूपये; पृष्ठ:112 , प्रथम संस्करण 2014

 

 #डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा ,H-604 ,प्रमुख हिल्स ,छरवाडा रोड ,वापी ,जिला वलसाड ,गुजरात (भारत)

पिन-396191

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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Responses

  1. Jyotsna ji aapne bahut sunder likha hai .aapka bahut bahut abhar ki aapne apna smy nikal kar pustak ko padha aur uski samiksha likhi .
    bahut bahut abhar
    Rachana

  2. पुस्तक पर मेरी भावनाओं को आपका स्नेह मिला ..बहुत बहुत धन्यवाद रचना जी !

    यहाँ स्थान देने के लिए संपादक द्वय के प्रति भी हृदय से आभारी हूँ !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  3. ..डॉ अनीता कपूर व रचना श्रीवास्तव का तहेदिल से धन्यवाद कि उनकी वजह से इस सुन्दर पुस्तक और सशक्त हाइकुकारों के बीच मेरी रचनाएं भी है …

  4. बधाई, अच्छी समीक्षा की है।

  5. वाह! समूचे ब्रह्माण्ड का चित्र आँखों के आगे आ गया ! ज्योत्स्ना शर्मा जी, आपकी लेखनी ने ‘आधी आबादी का आकाश’ के जो इंद्रधनुषी रंग बिखेरे हैं उससे मन अत्यंत पुलकित हुआ। बासठ हाइकुकारों के इस संकलन की संक्षिप्त में आपने जो व्याख्या की है वह अपने आप में अनूठी है। मुझे बेहद ख़ुशी है आप सभी के साथ-साथ मैं भी इस संकलन का एक हिस्सा हूँ ! अति सुन्दर समीक्षा !!
    आपकी लेखनी से ऐसे ही सुन्दर शब्दों के फूल झरते रहें ईश्वर से यही प्रार्थना है ! ह्रदय से आपको शुभकामनाएँ !!!
    आदरणीया रचना श्रीवास्तव जी एवं अनीता कपूर जी के साथ इस संकलन से जुड़ी हर कवयित्री को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ !

    ~सादर
    अनिता ललित

  6. आधी आबादी का आकाश की गहन ,सुन्दर और स्तरीय समीक्षा के लिए ज्योत्सना जी को हार्दिक बधाई|
    डॉ० अनीता कपूर जी एवं रचना जी का तहे दिल से शुक्रिया जिन्होने विश्व के ६२ महिला हाइकुकारों को एक ही स्थान पर इकट्ठा किया और मुझे भी इसका हिस्सा बनाया|
    आभार, बधाई एवं शुभकामनाएँ !!

  7. ज्योत्स्ना जी ने बहुत मेहनत से “आधी आबादी का आकाश ” की समीक्षा दी है !!अनीता जी एवं रचना श्रीवास्तव जी का तहे दिल से शुक्रिया की हम सभी को पुस्तक में स्थान मिला !! पुनः हार्दिक आभार आप सब को !!

  8. अनीता कपूर और रचना श्रीवास्तव जी ने अनेक हाइकु कारों को एक मंच पर प्रस्तुत कर प्रशंसनीय काम किया है । डा ज्योत्स्ना जी की समीक्षा पढ़ी जिस में अनेक रचनाकारों के विविध प्रकार के हाइकुओं पर टिप्पणी की कई है । यह पुस्तक मुद्रित रूप में भी पढ़ी जा सकती है । सम्पादिका द्वय और प्रकाशक बधाई के पात्र हैं ।

  9. डा० ज्योत्स्ना शर्मा जी आपने बहुत खूबसूरत ढ़ंग से संकलन की समीक्षा की…..बहुत-२ बधाई !
    रचना श्रीवास्तव जी और डा० अनीता कपूर जी की मैं ह्रदय से कृतज्ञ हूँ जिन्होंने समर्थ हाइकुकारों के बीच मेरी रचनाओं को इस खूबसूरत संकलन में शामिल कर मेरा उत्साह बढ़ाया ।

  10. bahinji, ApakI sundar samIksa dvArA achchI pustak kI jAnkArI milee. pustak behad gyAn vardhak hai. badhAI.

  11. एक बहुत सहेजने वाली पुस्तक के लिए बड़ी मेहनत से एक सार्थक और अच्छी समीक्षा लिखी है आपने ज्योत्सना जी…बधाई…|
    रचना जी और अनीता जी का आभार जो उन्होंने इस संग्रह में मुझे भी स्थान दिया…|

  12. डा० ज्योत्स्ना ने बहुत खूबसूरत ढ़ंग से संकलन की समीक्षा की…..बहुत-२ बधाई और ढेरों शुभकामनाएँ !

  13. jyotsana ji apane anita ji va rachana ji ke athak prayas se sankalit “aaadhi abadi ka akash”ki sameeksha atyant manoyog se likhi hai is hetu ap badhai ki patra hain. apaki lekhani ki to main sada hi prasansha karati rahi hun. .sameeksha mein apane mujhe bhi sthan de kar mera utsah badhaya .apako hardik dhanyavad.
    pushpa mehra.

  14. jyotsnaji aapne apne bhavo ke motiyo se pustak par jo prakash dala hai
    vah bada hi sunder ban pada hai ……aadarniye rachna ji aur anita ji itni saari mahaan hastiyon ko ek saath laakar aur usme mujhe bhi sthaan dekar kritarth kar diya….ishwaar kare yeh pustak uchaiyon ke utkarsh ko choo le….aabhaar v duaon ke saath 🙂 🙂

  15. पुस्तक के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति को जो स्नेह और सम्मान आपने दिया उसके लिए मैं आप सभी की बहुत बहुत आभारी हूँ |

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  16. डॉ. ज्योत्सना जी की मैं आभारी हूँ जिन्होंने डॉ .अनिता जी , रचना जी के संपादित ‘ आधी आबादी का आकाश ‘ की सशक्त , , सुंदर समीक्षा की .
    मुख पृष्ट जितना आकर्षित है उतना ही भाव पक्ष और कला पक्ष की दृष्टि से सभी बासठ हाइकुकारों की रचनाएँ . जिसमें मेरे भी हाइकु हैं . ये किताब मेरे हाथ में है . सभी हाइकु प्रेरणात्मक , संदेशात्मक तथा साहित्यिक शिल्प विधान से जड़ित हैं .ऐसा लगता है कि गागर में सागर भर दिया .
    अयन प्रकाशन के साथ सभी को मेरी बधाई .

    आदरणीय भाई रामेश्वर जी और दीदी डॉ हरदीप जी का धन्यवाद जिनके अथक परिश्रम ने हाइकु विधा को बढावा दिया . जिनकी वजह से हमारी रचनाओं को साहित्यिक जगत में स्थान मिला .

    साहित्य जगत को , हम सब को आगे भी इसी तरह नई रचनाओं के संकलन का इंतजार रहेगा .

  17. हिन्दी हाइकु हमारा परिवार है , जिसका आधार है अपनापन । समीक्षा में सबके नाम आ पाना सम्भव नहीं होता । उदाहरण स्वरूप बानगी दी गई है , जिनका नाम नहीं आ सका , वे भी उतने ही महत्त्वपूर्ण हैं। एक बात पर आप ज़रूर अपना विश्वास रखिए कि रचनाकार अपनी अच्छी रचना से ही बड़ा बनता है। हम हर उत्कृष्ट रचना को हिन्दी हाइकु पर देना चाहते हैं, चाहे उसका रचनाकार 18 वर्ष का हो चाहे 90 वर्ष का । हिन्दी में बहुत से ऐसे वरिष्ठ हाइकुकार हैं,जो बरसों से साधारण लेखन कर रहे हैं, उनके कमज़ोर लेखन को हमने हिन्दी हाइकु पर नहीं दिया । आप सबका स्नेह ही हम दोनों की और हाइकु परिवार की शक्ति है। इसे बनाए रखिए।

  18. ज्योत्स्ना जी ने बहुत अच्छी समीक्षा की है, उन्हें हार्दिक बधाई. पुस्तक में मुझे स्थान देने के लिए अनिता जी और रचना जी की मैं बहुत आभारी हूँ.


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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