Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 29, 2014

कुर्सी है प्यारी


 

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

1

आए चुनाव

फिर दे के जाएँ न

दिल पे घाव

2

रखे न खोट

जो दिल में ,उसको

देना है वोट ।

3

थैली  न नोट

मिलकर करनी

भ्रष्टों पे चोट ।

4

है चिंता भारी

जनहित की ओट

कुर्सी है प्यारी ।

5

किधर मुड़े

मतदाता , नेता की

निंदिया उड़े ।

6

सीधा-सपाट

जो न काम-धाम का

हराना उसे ।

7

सबसे न्यारा

मत-पर्व हो जाए

सबको प्यारा ।

-0-

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Responses

  1. सुन्दर, सामयिक, सार्थक हाइकु ! ये विषय आसान नहीं …फिर भी आपने बहुत बढ़िया लिखा ज्योत्स्ना शर्मा जी !
    हार्दिक बधाई आपको ! 🙂

    ~सादर
    अनिता ललित

  2. chunavi mahaoul pr khoob likha hai
    badhai
    rachana

  3. बहुत बढ़िया हाइकु ज्योत्स्ना जी….बधाई !

  4. bahut hi sarthak,sunder haiku hai chunavi vatavaran par ….badhai aapko jyotsnaji

  5. सभी चुनावी हाइकु बेहद उम्दा और सटीक; ज्योत्स्ना जी, हार्दिक अभिनन्दन आपका !

  6. हृदय से आभार आप सभी सुधीजनों का …सादर नमन !

  7. सामयिक…सटीक हाइकु के लिए बधाई…|


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