Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 27, 2014

साँझ की बेला


1-सविता अग्रवालसवि

1

भरा सागर

फिर भी  मैं प्यासी

सूखी रेत-सी

2

साँझ की बेला

लगता धरा पर

 रंग उकेरे ।

3

उम्र  गुज़री

समझ  भी    पाई

रही  अधूरी

4

जग  की  भीड़

दिवस  बीत  गया

शामहोगई ।

-0-

 2-मीरा गोयल

1

झूलें सखियाँ

गाएँ गीत मल्हार

उमड़े मेघा ।

2

गाएँ सखियाँ

रसीली कजरिया

 मुदित मन ।

3

गरजे नभ

बहुरिया अधीर

प्रीतम दूर ।

4

ऋतु सावन

प्रीतम नहीं पास

मन उदास ।

5

अन्धेरी रात

घनघोर घटाएँ

दीपक हाथ ।

 -0-

Advertisements

Responses

  1. भावों का सुंदर चित्रण .
    मीरा , अमिता जी बधाई

  2. भरा सागर
    फिर भी मैं प्यासी
    सूखी रेत सी । यह बढ़िया हाइकु है ।

  3. sabhi marmik haiku.
    aap donon ko bdhaai.
    dvay sampadak ji ko
    hardik pranaam.

  4. बहुत सुन्दर हाइकु। जीवन की साँझ का ख़ूबसूरत चित्रण किया आपने …सविता अग्रवाल ‘सवि’ जी।
    आपको हार्दिक बधाई।

    ~सादर
    अनिता ललित

    मेघ-मल्हार-सावन बहुत सुन्दर चित्रण …मीरा गोयल जी।
    हार्दिक बधाई आपको।

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. साँझ के दोनों पक्षों को सुन्दरता से कहा सविता जी बहुत बधाई !!

    सावन पर मनभावन हाइकु मीरा गोयल जी ..हार्दिक शुभ कामनाएँ !!

  6. सुन्दर, भावपूर्ण हाइकु के लिए हार्दिक बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: