Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 19, 2014

बादलों के घुँघरू


1-  पुष्पा मेहरा        

 1

 वो बच्चा ही था

 बचपन था मेरा

 वक्ष से लगा ।

2

 टूट के गिरे

 बादलों के घुँघरू

 बाँधे धरा ने ।

3

 मुझे जो मिले

 आस्तीन के साँप थे

 दंश दे गये ।

4

 नैनों की गोद

 सो रहे हैं सपने

 जगा दो उन्हें ।

5

 बाँच लें प्रेम

 मन- पाटी पे लिखें

 एक ही नाम ।

-0-

2-शांति पुरोहित

       1

कटते   वृक्ष

फलता  व्यवसाय

घटती  छाया

     2

गगनाँगन

भोर छिपते तारे

साँझ  को भानु

   3

  बहती  नदी

घाट  कब  ठहरी

वय  के  जैसी ।

   4

थोड़ीसीधूप

सबओरअँधेरा

भाग्यहैमेरा

  5

रेत  के टीले

तपन  का तूफान

बढ़ी  उमस ।

 -0-

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Responses

  1. SABHI UMDAA HAIKU.BADHAAI.

  2. sabhi haiku pyre lage …badhai


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