Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 18, 2014

सुनहरी झाँझर


अनिता  ललित

1

राह सँवारें

पेड़ से टूटे तो क्या,

धरा पे बिछे !

2

 पहने धरा !

सुनहरी झाँझर

पतझर में!

3

चुभते हुए

पतझर के गीत

मन भिगोते !

4

 बिन प्यार के

पतझर जीवन

झरता जाए!

5

 सूखे पत्ते

होकर भूलुण्ठित

कहें कहानी!

-0-

 

 

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Responses

  1. सुन्दर भाव एवं बिम्ब…

    पहने धरा !
    सुनहरी झाँझर
    पतझर में!

    सभी हाइकु बहुत उम्दा, बधाई.

  2. बिन प्यार के
    पतझर जीवन
    झरता जाए!
    bahut sahi kaha aapne aesa hi hai
    badhai
    rachana

  3. पहने धरा !
    सुनहरी झाँझर
    पतझर में!

    बहुत सुन्दर …..बधाई !

  4. जेन्नी जी, रचना जी, कृष्णा जी हाइकु हार्दिक आभार !

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. sabhi haikusunder bhaav liye…4th…bahut hi pyara…badhai antiaji

  6. …MAN BHIGOTE.
    SABHI PYARE HAIKU.
    DIDI BADHAAI.

  7. चुभते हुए

    पतझर के गीत

    मन भिगोते !
    बहुत सुन्दर…बधाई…|


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