Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 18, 2014

चाँद-चाँदनी


चाँद-चाँदनी

1-डॉ  जेनी शबनम

1

तप करता

श्मशान में रात को

अघोरी चाँद !

2

चाँद न आया

इंतज़ार करती

रात परेशाँ !

3

वादाखिलाफ़ी

चाँद ने फिर से की

फिर न आया !

4

ख़्वाबों में आई

दबे पाँव चाँदनी

बरगलाने ।

5

तमाम रात

आँधियाँ चली, पर

चाँद न उड़ा ।

6

पूरनमासी

जिनगी में है लाई

पी का सनेस ।

7

नशे में धुत्त

लड़खड़ाता चाँद

झील में डूबा ।

-0-

2-डा. जया ‘नर्गिस’

1

चढ़ते हुए

चढाई,अपनों से

बाँह छुड़ाई

2

धरा-आकश

अणु-परमाणु में

तेरा आभास

3

घेर लेती है

जब-जब तन्हाई

माँ याद आई

4

बुलबुले ने

फूटके कह दिया

जिंदगी है क्या ?

5

नही भरोसा,

तो रिश्तों का क्या अर्थ

जीवन व्यर्थ

-0-

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Responses

  1. तमाम रात
    आँधियाँ चली, पर
    चाँद न उड़ा ।
    -0-
    घेर लेती है
    जब-जब तन्हाई
    माँ याद आई ।
    bhavon ka sagar
    badhai aap dono ko
    rachana

  2. उम्दा भावपूर्ण हाइकु !
    जेन्नी जी, जया जी बधाई !

  3. चाँद और चाँदनी… बहुत सुन्दर हाइकु जेन्नी जी !
    हार्दिक बधाई !

    जीवन के विभिन्न रूप… अति सुन्दर हाइकु डॉ जाया जी !
    हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. …MAAN YAD AAI.
    …HAIKU.
    …BADHAAI.

  5. तमाम रात
    आँधियाँ चली, पर
    चाँद न उड़ा ।
    क्या बात है…!

    बुलबुले ने
    फूटके कह दिया-
    जिंदगी है क्या ?
    नश्वरता का बोध…|
    बधाई…|


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