Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 16, 2014

पात पुराने


भावना सक्सैना
1
धरती घूमे
ऋतु ले करवट
फैले पीताभा ।
2
यूँ झरे पात
बिछी धरती पर
स्वर्ण- चादर ।
3
हो पीत पत्र
लौटे धरती पर
भर निःश्वास ।
16 अप्रैल4
वृक्ष निर्वस्त्र
उतरा पतझड़
लिए उदासी ।
5
सूना- सा मन
पतझर के दिन
भीगी अँखियाँ ।
दीपक घोष- (2)6
पात पुराने
कहें एक कहानी-
बीती जवानी !
7
प्रेम- विहीन
जीवन पतझर
खिलें न फूल ।
-0-

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Responses

  1. भावना जी, सभी हाइकू उत्कृष्ट | बधाई |

  2. सभी हाइकु बहुत बढ़िया भावना जी…..बधाई !

  3. सूना- सा मन
    पतझर के दिन
    भीगी अँखियाँ ।

    पात पुराने
    कहें एक कहानी-
    बीती जवानी !

    भावना जी बहुत ही उत्‍कृष्‍ट हाइकु …….बधाई।

  4. seema ji sabhi haiku achhe likhe hain. badhai.

  5. main bhul se bhavana ke sthan pat seema likh gayi hoon.
    pushpa mehra.

  6. सभी हाइकु उत्कृष्ट !
    बहुत-बहुत बधाई भावना सक्सेना जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. पात पुराने
    कहें एक कहानी-
    बीती जवानी !
    कितनी सच्ची बात है…| बधाई…|


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