Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 16, 2014

‘आँगन में गौरैया’-डॉ सुधा गुप्ता


डॉ  कुँवर  दिनेश सिंह  के ‘आँगन में गौरैया’-डॉ सुधा गुप्ता

 ANGAN MEN GAURAIYA       कविता के संसार में रहने वालों को विभिन्न अनुभवों से गुज़रना पड़ता है-कोई संग्रह पढ़ने को मिलता है-कविता अच्छी होती है; किन्तु प्रस्तुतीकरण की त्रुटियों और कमियों के कारण अच्छी –भली कविता ‘बेचारगी’  का शिकार हो जाती है; कभी प्रस्तुतीकरण आकर्षक होता है; किन्तु सामग्री के नाम पर निराशा  हाथ लगती है ।

          जहाँ प्रस्तुतीकरण और सामग्री का अभूतपूर्व सन्तुलन हो। बल्कि प्रतिस्पर्धा हो कि कौन  श्रेयस्कर है, ऐसे ही काव्य को ‘मणि-कांचन’  संयोग कहा जाता है ! डॉ कुँवर  दिनेश सिंह का हाइकु-संग्रह ‘आँगन में गौरैया’ एक ऐसा ही ‘मणि-कांचन’  संयोग है।  प्रस्तुति नयनाभिराम, सौन्दर्यबोध एकदम  परितृप्त  ! हाइकु इतने खूबसूरत कि जिनकी प्रशंसा को शब्दकोश की शरण  में जाकर  भी मन –माफ़िक शब्द न मिलें !

          हाइकु आज हिन्दी में पर्याप्त लोकप्रिय विधा है  , तथापि ‘हाइकु’ की आत्मा के साथ सख्य भाव स्थापित करने वाले नाम  अँगुली पर गिनाए जा सकते हैं ।

डॉ कुँवर  दिनेश सिंह अंग्रेज़ी भाषा के निष्णात विद्वान् , सहृदय कवि , समर्थ  समालोचक : एक स्थापित व्यक्तित्व । वहीं हिन्दी के भी ख्यातनामा  कवि और हाइकुकार हैं , यह हाइकु –जगत् का सौभाग्य है। अपने प्रथम हाइकु-संग्रह ‘आँगन में गौरैया’ के बलबूते पर  आप प्रथम  पंक्ति के हाइकुकार  की गरिमा के अधिकारी बन गए  हैं । आपके द्वारा रचित हाइकु  कसौटी पर खरे उतरे  हैं, प्राणवान् हैं :  सारांश यह कि कल्पना –वैशिष्ट्य और  अभिव्यक्ति  -कौशल का सुन्दर संगम है  इन हाइकु में ! प्रथम और तीसरी पंक्ति में  अन्त्यानुप्रास ने विशेष लय और गीतात्मकता की निर्मिति  की है । कुछ उदाहरण द्रष्टव्य हैं-

 1-फूले बादाम / हरे तोतों के दल / भूले आराम ।

2-सरसों फूली / हरी बाहों पे पीली / पँखुरी झूली ।

3-छैल चिनार / रंग बदल रहा / ॠतु –विचार ।

4-पिंक बुराँश / सदा-सदा के लिए / ठहरे काश !

ऐसे सामर्थ्यवान् , जीवन्त , वास्तविकता से ओतप्रोत हाइकु वही लिख सकता है ,जिसे प्रकृति से अटूट , गहरा लगाव हो  और जिसमें सूक्ष्मपर्यवेक्षण की क्षमता हो ।

शीर्षक  हाइकु की बात किए बिना प्रसंग अधूरा रहेगा

        आकुल आए / आँगन में गौरैया / आस लगाए ।

कुँवर  दिनेश सिंह ने गौरैया की फुदकन में छिपी आतुरता, दाना-दुनका पाने की प्रत्याशा सम्बन्धी प्रत्येक भंगिमा को अपने छवि-चित्र में क़ैद कर लिया है !  सन्ध्या –समय   चिड़ियों की चहचहाहट और झुण्डों में उड़ना  कितना सहज है :

        शाम की बेला/ चिड़ियों के झुण्ड की  / रेलमपेला ।

दो अनूठी –अछूती  कल्पना –छवियों की कुशल अभिव्यंजना  दर्शनीय है :

        काले बादल/ चाँद निकला आज / ओढ़े कम्बल ।

        व्योम हवेली / शाम की दुल्हन / नई नवेली ।

 एक पृष्ठ पर एक हाइकु की सज्जा के साथ हाइकु के अनुरूप सर्वजीत सिंह के रेखांकन बहुत प्रभावशाली बन पड़े हैं।हिन्दी हाइकु-संसार को डॉ  कुँवर  दिनेश सिंह की समर्थ लेखनी से बहुत आशाएँ हैं।

आँगन में गौरैया ( हाइकु-संग्रह): कुँवर  दिनेश ; मूल्य:225 रुपये ;पृष्ठ :64 ; संस्करण: 2013,प्रकाशक ;अभिनव प्रकाशन,4424, नई सड़क, दिल्ली-110006

 

-0-

  डॉ सुधा गुप्ता  

120 बी / 2 साकेत मेरठ 250003

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Responses

  1. सुधा गुप्त जी को मैं कवयित्री के रूप में जानता था ।उन से मेरठ में मिल चुका हूँ।आज उन के आलोचक रूप से परिचित हुआ । कवि दिनेश सिंह से पहली बार परिचित हुआ ।कवि और आलोचक दोनों को बधाई ।

  2. B A D H A A I…

  3. सार्थक…बधाई…| बहुत अच्छा लगा |

  4. बधाई, अच्छी लगी। कृपया इस तरह की समीक्षाएँ लगाते रहे। धीरे-धीरे सभी को पढ़ने की आदत हो जाएगी।

  5. आदरणीय सुधा गुप्ता जी द्वारा दी गई उत्कृष्ट समीक्षा के लिए बधाई|
    डॉ कुँवर दिनेश सिंह जी के जो भी हाइकु यहाँ पर दिए गए हैं उनको पढ़ने के बाद बाकी हाइकु पढ़ने की लालसा स्वतः ही जागृत हो गई…कवि को अनंत बधाई एवं शुभकामनाएँ !!

  6. अत्युत्तम समीक्षा के लिए आदरणीय सुधा गुप्ता जी को…हार्दिक बधाई !
    बहुत बढ़िया हाइकु दिनेश सिंह जी….बहुत-२ बधाई !

  7. आप सबकी उपस्थिति हमारा मनोबल बढ़ाती है। सबका हार्दिक आभार !

  8. क्षमा माँगें /अस्त व्यस्त जीवन/ थका सा मन —- और उस पर सोने पे सुहागा नेट कभी गायब तो कभी बेहद धीमा… दो दिन पहले ही नए सर्वर से नेट शुरु किया है… धीरे धीरे लिखने पढ़ने की गति भी तेज हो जाएगी…
    दॉ सुधा द्वारा डॉ कुँअर के हाइकु संग्रह की समीक्षा सरल सहज भाव से प्रभाव छोड़ती है…

    व्योम हवेली / शाम की दुल्हन / नई नवेली ।
    आकुल आए / आँगन में गौरैया / आस लगाए ।
    सभी हाइकु अपने आप में विशेष हैं लेकिन पाठक के मन को पहले जो छू जाए वह उसी का उल्लेख पहले करता है ..

  9. sunder bhavon ki atisunder samiksha
    rachana

  10. आदरणीया सुधा दीदी को सुंदर समीक्षा के लिए बधाई .

    डॉ . कुंवर दिनेश जी की पुस्तक के लिए बधाई .

    साहित्यिक जगत को उनकी अगली किताब का इंतजार रहेगा .

  11. सुन्दर ,समर्थ पुस्तक की मोहक ,सारगर्भित समीक्षा …हार्दिक बधाई एवं नमन आदरणीया दीदी और डॉ. कुंवर दिनेश जी के प्रति !!


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