Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 12, 2014

जीवन-पतझर


12-5डॉ. सुनीता वर्मा

1

पेड़ से टूटे

जीवन की डाल से

बंधन छूटे!

2

तन से प्राण

कुछ यूँ निकलते

गिरते पत्ते!

3

कलियाँ खिलीं

पतझर के बाद

बहारें मिलीं!

4

जीवन-वृक्ष

सहता पतझर

दर-ब-दर!

5

मन बैरागी

जीवन-पतझर

हो गया त्यागी

6

बिखरे पत्ते

आँगनभर फैले

कौन बुहारे?

7

पेड़ से गिरे

कपड़े बदलते

झरते पत्ते!

8

वीरान राहें

सुनसान जंगल

छाया सन्नाटा

9

छोड़ के जाना

सबको ये संसार

ज्यों टूटे पत्ते!

10

पीत पल्लव

डाल से टूटकर

गिरे भू पर!

11

पत्तियाँ गिरीं

जीवन संध्या-काल

उमर ढली!

12

टूटते रिश्ते

दरकता दर्पण

पतझर में!

13

मन-आँगन

पतझर मौसम

उदास नैन!

14

झरी पत्तियाँ

नूतन कलेवर

झूमती शाख़ें

15

बीता मौसम

पतझर के बाद

आयेगा याद!

16

नवीन चोला

छमकती डालियाँ

रूप सलोना

17

विहग उड़े

छोड़कर घोंसला

पतझर में!

18

हो गयी ठंडी

बदले मौसम में

रिश्तों की ऊष्मा!

-0-

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Responses

  1. JEEVAN KI MARMIK ABHIVYAKTI SE OTPROT HAIKU MAN BHAYE. BAHINJI PRANAAM.

  2. पतझड़ को लेकर लिखे सभी हाइकु बेहतरीन; डॉ सुनीता वर्मा जी बहुत – बहुत बधाई।

  3. उमदा हाइकु सुनीता वर्मा जी…..बधाई !

  4. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक …हार्दिक बधाई !!

  5. उत्कृष्ट हाइकु के लिए बधाई

  6. मन बैरागी
    जीवन-पतझर
    हो गया त्यागी
    बहुत प्यारा हाइकु,,,बधाई…|


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