Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 12, 2014

चाँद का रथ-दूर तक उड़ान


 शशि पाधा

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झरते पात

पीत शिथिल गात

विधि- विधान ।

 2

काँपती डाली

अब के जो बिछुड़े

फिर ना मिलें ।

3

हवा ने कहा

दूर तक उड़ान

चलूँगी संग |

4

नयन बसी

पतझर की पीड़ा

नीरव झरी |

 5

आवागमन

पतझड़ वसंत

जीवन क्रम ।

6

छूटे ना आस

मौसम बदलते

रहे विश्वास ।

-0-

कश्मीरी लाल चावला

1

यादों का घेरा

कर गई सवेरा

रात के बाद

2

गाती पवन

छे गई तराना

छूकर  तन

3

एक किताब

यादों का इतिहास

झील सी आँखें

4

चाँद का रथ

फेर सूरज रथ

बाँटे रोशनी

5

मन की पीड़ा

उछलती लहर

तोड़े किनारे

6

यादों का चाँ

रात भर चमका

हुआ सवेरा 

-0-

 

 

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Responses

  1. पतझड़ से जुड़े आपके सभी हाइकु मन को सुहाए ; शशि पाधा जी आपको हार्दिक बधाई।

  2. सभी हाइकू गहन भाव भरे ।

  3. सुन्दर भाव पूर्ण हाइकु …

    दूर तक उड़ान …और ..यादों का चाँद ..बहुत अच्छे लगे .
    हार्दिक बधाई !!

  4. उत्कृष्ट हाइकु के लिए बधाई

  5. काँपती डाली
    अब के जो बिछुड़े
    फिर ना मिलें ।
    बिछोह की पूरी व्यथा झलक गयी इसमें…|

    यादों का चाँद
    रात भर चमका
    हुआ सवेरा ।
    बहुत सुन्दर…|

    बधाई…|


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