Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 6, 2014

निगोड़ा पतझर


1-कमला निखुर्पा

काम्बोज1

पाती सहेली

गाती हवा के संग 

खोई रे कहाँ ।

2

डाल डाल पे

पूछती फिरे पता

पगली हवा ।

3

डरी पत्तियाँ

काँपी थरथराई

पीली हैं पड़ी ।

4

मानता नहीं

निगोड़ा पतझर

गिराके छोड़े । 

5

छुपाए तन

डालियों की ओट ले

सहमा तरु ।

6

बदले रुत

जाएगा पतझर

हँसेगी कली  ।

7

गाएगी पाती

मर्मर के स्वर में

जीवन- गीत ।

 -0-

2-प्रियंका गुप्ता

1

पीले पत्ते थे

कब तक रहते

शाख पे टिके ।

2

मन में खिली

भावना की कोंपलें

गंध बिखेरे ।

3

तेज़ हवाएँ

कमज़ोर डालियाँ

सूनी हो जाएँ ।

4

दिल की ज़मीं

झरे तो दब गए

सम्बन्ध पत्र ।

5

डाली से छूटे

दबते-कुचलते

बिसात क्या ?

-0-

 ( फोटो-रामेश्वर काम्बोज)

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Responses

  1. पाती सहेली
    गाती हवा के संग
    खोई रे कहाँ ।

    दिल की ज़मीं
    झरे तो दब गए
    सम्बन्ध पत्र ।……कमला जी और प्रियंका जी …सभी हाइकु सुंदर और सारगर्भित हैं…बधाई

  2. सभी अजब – गजब भावानुभूति .

    बधाई आप दोनों को .

  3. BHAV PRADHAAN HAIKU.
    VINAMRA PRANAAM.

  4. बहुत भावपूर्ण हाइकु।

  5. पतझर पर बहुत भाव पूर्ण हाइकु .बधाई कमला जी एवं प्रियंका जी

  6. पतझर के बहुत भावपूर्ण हाइकु !

  7. behad bhaavpurn haiku …badhai


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