Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 4, 2014

मीरा-सी साँझ


डॉ सुधा गुप्ता

पतझर-11

बूढ़ा चेहरा

सिलवटों -से भरा

जर्जर गात ।

2

छाई ये कैसी

अजब वीरानगी

झरते पात ।

3

 क्या  खो गया रे ?

उड़ती हवाइयाँ

 होश हैं गुम

4

लुटी  सुषमा  

धरती बिलखती  

यूँ गुमसुम ।

5

चुप  न होता

झार-झार रोता है

आकुल नीम ।

6

जोगी आकाश  

बैरागिन-सी डोले  

अबोली हवा

7

उखड़ी  साँस

आफ़त का मारा-सा  

घूमे शिशिर ।

8

नहींठिकाना  

दर-दर के धक्के  

हुआ बेघर ।

9

सूखी पत्तियाँ

चुरमुर करती

पाँवों के तले ।

10

मीरा-सी साँझ  

जोगी की तलाश में  

भटक रही ।

-0-

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Responses

  1. SABHI HAIKU
    DIL KO CHHUNE VALE
    PRANAM TUMHEN

  2. सभी हाइकु चलचित्र की भांति नज़र से ग़ुज़र गए। ठीक उसी तरह जैसे ‘जोगी की तलाश में’ भटकती हुई ‘मीरा सी साँझ’ की तस्वीर आँखों के आगे साकार हो गयी।
    आदरणीय सुधा दीदी जी , आप हम सभी के लिए एक अनमोल आदर्श हैं !
    आपको नमन! आपकी लेखनी को नमन!!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  3. मीरा-सी साँझ
    जोगी की तलाश में
    भटक रही ।
    सुधा दी जब मैं पतझर पर आप के द्वारा लिखे हाइकु पढ़ रही तो लगा कि लेखनी में कमाल ये होता है।
    अनिता जी ने ठीक कहा कि आप एक अनमोल आदर्श हैं।
    सादर
    सीमा स्‍मृति

  4. अति सुन्दर भावों में भीगे मनमोहक हाइकु !
    आदरणीय सुधा जी आभार !

  5. बहुत ही सुन्दर और भावमय हाइकु. सुधा जी को हार्दिक बधाई.

  6. sudha didi ji apaki leeekhani ko naman.
    pushpa mehra.

  7. मनमोहित मनोहर सभी हाइकू .

    बधाई

  8. बहुत सुन्दर हाइकु , सुधा दीदी आपके हाइकु पढ़ना ही अपने आप में सुखद अनुभूति
    है।
    सुन्दर भाव हार्दिक बधाई आपको

    2014-04-04 17:28 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  9. sudha ji prnaam …..aap vandniy hai shubh hai vo kshan …jinme hume aapka likha kuch padhne ko milta hai….patjhar….atisunder

  10. मनमोहक, सारगर्भित, सराहनीय, एक से बड़ कर एक हाइकु !
    नमन

  11. मीरा-सी साँझ
    जोगी की तलाश में
    भटक रही ।
    आदरणीय सुधा जी इतने अनोखे और खूबसूरत शब्दों में अपनी बात कह जाती हैं कि मन प्रसन्न हो जाता है…|
    आभार और बधाई…|

  12. आदरणीया सुधा दीदी के हाइकु…सुन्दर और भावपूर्ण मन को भा गए…सादर प्रणाम|
    हमे भी कुछ सीखने का मौका मिल जाता है|

  13. सिलवटों से भरा गात , गुम होश ,गुमसुम धरती ,आकुल नीम , जोगी आकाश ,चुरमुर ध्वनि और मीरा सी साँझ ….पतझर के एक-एक दृश्य को साकार किया है आपने |
    प्रकृति के सूक्ष्म निरीक्षण और फिर बेहद प्रभावी प्रस्तुति करण में निपुण आपकी लेखनी सदैव आनंद का सृजन करती है …सादर नमन दीदी !!

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  14. पतझर पर लिखे आपके सभी हाइकु सुन्दर हैं। रामनवमी की शुभकामनाओं के साथ हार्दिक बधाई।


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