Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 3, 2014

जलें पलाश ।


राजीव गोयल

1

आग लगाए

ये ढलता सूरज

जलें पलाश ।

2

गुलाबी हुई

चिलचिलाती धूप

गोधूलि- बेला ।

3

थका सूरज

पहाड पर बैठा

साँझ की बेला ।

-0-

rajiv.goel55@gmail.com

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Responses

  1. rajieve ji prakrati par pyare haiku bahut sunder bhaavo ke saath……..badhai

  2. थका सूरज
    पहाड पर बैठा
    साँझ की बेला ।
    बहुत सुन्दर…बधाई…|

  3. सुन्दर ,मोहक संध्या वर्णन …बहुत बधाई !!!


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