Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 2, 2014

वक्त की स्याही


 

मंजु गुप्ता

1

वक्त की स्याही

दास्तान लिख डाले

राह बनाए ।

2

यादें वक्त की

दुख की बदली- सी

बरसी भू पे। 

3

प्रतिकूलता

हर पल  शाप- सी

मारती कोड़े  ।

4

काल की मार

जब भी मुझे लगी

मुँह की खाई ।

5

घावों की घड़ी

हमदर्दी के टाकें

सिल न सके  ।

-0-

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Responses

  1. yaado aur kaal par likhe haiku …sabhi pyre lage badhai ho manju ji

  2. वक्त की स्याही
    दास्तान लिख डाले
    राह बनाए ।
    मंजु जी ठीक कहा यही स्‍याही तो है जो जिन्‍दगी चलाती है।
    बधाई

  3. भावपूर्ण हाइकु !

  4. आप सभी का आभार हौंसलाअफजाई बढ़ाने के लिए .

  5. जीवन की सच्चाइयों से लिपटे सभी हाइकु बहुत भावपूर्ण !

    ~सादर
    अनिता ललित


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