Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 2, 2014

मेरी यादों में- पिता


 पुष्पा मेहरा      

 1

 जीवन-गीत

 पिता तुमने रचा

 गा रही हूँ मैं ।

2

 पिता की गोद

 खेला जो बचपन

 भूलेगा नहीं ।

3

 हे पिता! तुम

 मेरी शिराओं में हो

 नहीं हो दूर  ।

4

 हवाओं में हो

 तुम सूरज में हो

 चाँदनी में हो ।

5

 मेरी यादों में

 मेरे आदर्शों में हो

 मेरे बोल हो ।

6

 ज्ञान-दीप थे

 गुरु थे आचार के

 ढूँढूँ मैं उन्हें ।

7

 बाहर शोर

 मन में सन्नाटा

 यादों का घेरा ।

8

 झरा जो फूल

 सुगंध भर गया

 वो चहुँ ओर ।

9

 एक दीपक

 झल-झल जला था

 दे गया राह ।

10

 दुख – सरिता

 ढाढ़स पतवार

 कराती पार ।

-0-

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Responses

  1. sach kaha pushpa ji aapne pita humse kabhi bhi door nahi..unka racha geet hi hum gaate hai sabhi pyere …marmik haiku

  2. पिता का स्थान आकाश से भी ऊँचा माना गया है…| बहुत भावपूर्ण और मर्मस्पर्शी हाइकु हैं…बधाई…|

  3. भाव पूर्ण हाइकु । बधाई।

  4. पिता पर लिखे ह्रदयस्पर्शी हाइकु पुष्पा जी…..बधाई !

  5. पिता का आशीर्वाद हाइकू में बरसा दिया बढ़िया .
    बधाई

  6. PITAJI SMRITI
    BHAVPURN HAIKU
    BADHAI TUMHEN.

    PITAJI SADAA
    KARATE KHOOB PYAR
    DIYE SANSKAR.

  7. कब भूलती है पिता की गोद? कब भूलता है बचपन ? वो लोरी… वो बोली… कब भूलती भला… दिल भी भीग गया पुष्पा जी ….
    बहुत सुन्दर हाइकु सभी !

    ~सादर
    अनिता ललित


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