Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 31, 2014

थका है दु:ख


शांति पुरोहित

1

माँ रत्न माला

अँधेरे मे उजाला

शीत दुशाला ।

2

फूल -सुगंध

महमहाते पात

बौराया भौरा।

3

थका है दुःख

कभी सुख भी थका

प्रेम ना रुका ।

4    

भर अमृत

प्रेम- ह्रदय- दल

अनुरागिनी ।

5

मेघ गर्जन

कृषक मन हर्षे

सुधा बरसे।

6

हवा ठहरी

उमस धरा पर

जन विकल।

7   

माँ को सहना

बच्चों का अलगाव

करें कमाई।

-0-

Advertisements

Responses

  1. माँ को सहना
    बच्चों का अलगाव
    करें कमाई।
    sunder bhav
    rachana

  2. बहुत सुन्दर हाइकु !

  3. sabhi haiku bahut achhe likhe hain.badhai.
    pushpa mehra.

  4. रचना जी
    पुष्पा मेहरा जी
    कृष्णा जी
    आप सबका बहुत शुक्रिया


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: