Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 28, 2014

गगन गाए


अनुपमा त्रिपाठी

1

गगन गाए

पवन लहराए

मौन मुस्काए ।

2

कनक-मन

सुनहला  प्रभात

धूप-छुअन ।

3

समृद्धि देती

ज्यों शब्दों की लहर

भीगे कविता ।

4

लहर उठे

पल- छिन भीगे है

बावरा मन ।

5

बहती  रही

शब्द और भाव की

धार -सी नदी

6

ममता जैसे

अनवरत बरसे

मन सरसे ।

7

काठ -किवाड़

अब खोल दे मन

ज्योति जीवन ।

8

श्रद्धा सुमन

खिलता जब  मन

पूर्ण अर्चना ।

9

नील गगन

उड़ते पाखी- जैसा

आज है मन ।

10

चंचल कृष्णा

छवि उर समाई

मन मोहना ।

11

प्रेम की भाषा

स्वर नाद गूँजती

खिलाती आशा  ।

12

नीला आकाश

विस्तार पता मन

खिले जीवन

13

तुम से ही तो

मन की डोर बँधी

पतंग उड़ी

14

स्वर नाद- सा

कलाकृत जीवन

सुकृत मन॥

15

मन मंडप

छाए पात घनेरे

गाऊँ आली रे ।

-0-

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Responses

  1. बहुत खूबसूरत हाइकु….बधाई…|

  2. बहुत सुन्दर , पावन भाव लिए हुए सभी हाइकु !
    हार्दिक बधाई अनुपमा जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  3. sabhi haiku bahut sunder likhe hain.vishesh roop se
    prem ki bhasha , swar nad gunjati , khilati asha. bahut sunder bhav hai. anupma ji apko badhai.
    pushpa mehra.

  4. काठ -किवाड़
    अब खोल दे मन
    ज्योति जीवन ।
    sunder bhav aur abhivayakti
    rachana

  5. बहुत खूबसूरत हाइकु अनुपमा जी….बधाई !

  6. हृदय से आभार हिमांशु भैया जी एवं हरदीप जी यहाँ आपने मेरे हाइकु लिए …!!आपका समय समय पर प्रोत्साहन मिलता ही रहता है !!।पुनः आभार .!!


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