Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 25, 2014

मुट्ठी से झरे


1-प्रियंका गुप्ता

1

चटका गया

समय का पहिया

दिल की ज़मीं ।

2

मुट्ठी से झरे

जीवन पन्ने रँगे

वक़्त के रंग ।

3

वक़्त की गर्द

छिपा लेती यादों को,

मिटा न पाती ।

सदा सिखाती

वक़्त की पाठशाला

सीख सको तो ।

-0-

2-विभा रानी श्रीवास्तव

1

ताप व शीत

जीवन  संतुलित

सूरज -चाँद ।

2

गोदी चढ़ता

सूरज कभी चाँद

धरा की मर्जी ।

3

गिरि वसन

धूसर अँगरखा

उजली टोपी ।

-0-

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Responses

  1. Bahut Khub!

  2. sabhi haiku bahut achhe likhe hain.priyanka gupta va vibha ji ko badhai.
    pushpa mehra.

  3. बहुत सुन्दर हाइकु आप दोनो को….बधाई!

  4. waqut par likhe bahut hi bhavpurn haiku hai priyanka ji ,…..badhai

  5. vibha ji sunder haiku ke liye badhai

  6. आप सबका बहुत आभार…

  7. सुंदर प्रस्तुति

    बधाई

  8. वक़्त की गर्द

    छिपा लेती यादों को,

    मिटा न पाती ।….yathaarth …..

    गिरि वसन

    धूसर अँगरखा

    उजली टोपी ।..kyaa bat hai ….sundar bimb …badhaaii aap dono ko !!

  9. आभारी हूँ ….. बहुत बहुत धन्यवाद आपलोगों का ….


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