Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 24, 2014

समय -रथ


1-डॉ जेन्नी शबनम

1.

रोके न रुके

अपनी चाल चले

समय -रथ !

2.

न देख पीछे

सब अपने छूटे

यही है सच !

3. 

नहीं फूटता

सदा भरा रहता

दुःखों का घट ! 

4.

स्वीकार किया

ज़िन्दगी से जो मिला

नहीं शिकवा !

-0-

2-सीमा स्मृति

1

वक्त की धार

नैया पार या डूबे

है,  मझधार ।

2

पढ़ लो आँखें

सुना देंगी कहानी

ये अनकही।

-0-

3-डॉ सरस्वती माथुर

1

सपने टूटे

समय बलवान

पड़ाव छूटे ।

2

आदि न अंत

समय- गतिमान

चले अनंत ।

-0-

 

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Responses

  1. बहुत-बहुत सुन्दर हाइकु ! भीगे-भीगे भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति !
    हार्दिक बधाई जेन्नी जी, सीमा जी, सरस्वती जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  2. आदि न अंत
    समय- गतिमान
    चले अनंत यह तो सत्य है

    सभी हाइकु एक से बढ़कर एक हैं .
    बधाई

  3. sabhi haiku bahut achhe likhe hain shabanam ji, mathur ji,seema ji ap sabako badhai.
    pushpa mehra.

  4. कभी सुख तो कभी दुःख से परिपूर्ण समय की कहानी कहते सुन्दर हाइकु ..बधाई आप सभी को !

  5. सुख-दुःख…अच्छा-बुरा सब अपने अन्दर समेटे वक्त पर बहुत सटीक हाइकु…सबको बधाई…|

  6. समय के रंगों का सुन्दर विवरण …..आप सबको बहुत बधाई !


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