Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 23, 2014

यादें


पुष्पा मेहरा

2-कमला1

यादें हमारी

पत्थर की लकीर

मिटीं न कभी ।

2

स्मृति – वन में

घूमा जो बचपन,

ठगी गई मैं ।

3

शूल– सी यादें

चुभती हैं मन में

रोती हैं आँखें ।

4

दु:ख के पल

सँजोती गईं यादें

सखी बन के ।

-0-

 

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Responses

  1. बहुत सुन्दर हाइकू…बधाई…

  2. यथार्थ सुंदर चित्रण

    बधाई

  3. सच है! यादें कहाँ भूलती हैं…बहुत याद आती हैं, पलकें भिगोती हैं !
    बहुत सुन्दर हाइकु पुष्पा मेहरा जी ! बहुत बधाई आपको!

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. सुन्दर हाइकु…सादर बधाई पुष्पा मेहरा जी को|

  5. यादों का सुन्दर चित्रण….बधाई पुष्पा मेहरा जी !


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