Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 19, 2014

मुट्ठी में यादें।


भावना सक्सैना

1.

तिक्त, सुहानी

जीवन की ऋतुएँ

लिखें कहानी।

2.

सहेजे पल

अँजुरी भर -भर

रोक न पाई।

3.

गुज़रा वक्त

अंकित मन पर

कितने पल।

4.

उम्र सारी ही

समय में समाई

मुट्ठी में यादें।

 -0-

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Responses

  1. yadon par likhe sabhi haiku sunder likhe hain. seema ji apako bahut badhai.
    pushpa mehra.

  2. उत्कृष्ट लगे
    बधाई

  3. yadon par likhe haiku khoobsurat likhe hain …badhai

  4. बढ़िया हाइकु….बधाई

  5. आदरणीय भावना जी बहुत सुन्दर हाइकु लगे हार्दिक बधाई , सभी हाइकु सुन्दर गहन
    भाव लिए हुए बहुत प्यारे लगे
    उम्र सारी ही समय में समाई मुट्ठी में यादें। -0-……… सच ही है जीवन में सिर्फ
    मुट्ठी भर सुन्दर यादें ही रह जाती है।

    2014-03-20 0:01 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब
    पत्रिका’-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है !” :

    > रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ posted: “भावना सक्सैना 1. तिक्त, सुहानी
    > जीवन की ऋतुएँ लिखें कहानी। 2. सहेजे पल अँजुरी भर -भर रोक न पाई। 3. गुज़रा
    > वक्त अंकित मन पर कितने पल। 4. उम्र सारी ही समय में समाई मुट्ठी में यादें।
    > -0-“

  6. सतत परिवर्तनशील समय को संजोये बहुत सुन्दर हाइकु …बधाई भावना जी


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