Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 17, 2014

राग-विहाग


ज्योत्स्ना प्रदीप

1

कैसा ये फाग?

रात को जाग,गाऊँ

राग- विहाग ।

2

आते हो तुम

घर में सालों-साल

जैसे गुलाल ।

3

तेरे रंग में

रंग कर मनाई

ये होली स्थायी  ।

4

तुम्हारी होली

शहीद हुए देखो

पलाश पुष्प !

5

अग्नि-पूजन

तप ही करता है

मन-पावन ।

6

चंग ,मृदंग

टेसू ,गुलाल ,रंग

सदा हो संग ।

-0-

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Responses

  1. रचनाओं ने रंग दिया होली को .

    बधाई .

  2. jyotsana ji apapke sabhi haiku holi ke sthai rangon se range hain ..apake rangmay jeevan ki subhkamana ke sath holi ki subhkamnayen.
    pushpa mehra.

  3. बहुत सुन्दर स्थायी होली …..बहुत बधाई !!!

  4. manju ji ,pushpa ji ,jyotsna ji ….aap khud hi bahut pyre rachnakaar hain …..utsah aur bhi badh jata hai dil se aabhaar

  5. सुन्दर हाइकु…बधाई…|

  6. Jyotsana ji apapke holi haiku holi ke asli rang hain, heartly congratulations

  7. Wah!!!! kya baat hai, with deep regards


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