Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 13, 2014

राग भैरव


शशि पाधा

  1

इंद्र धनुष

सतरंगी अक्षर

नेह सन्देश ।

   2

सोन सवेरा

तरुवर शिखर

धूप बसेरा ।

   3

नीड़ देहरी

कलरव संगीत

 प्रभात फेरी ।

    4

माणिक मोती

ओस कण लड़ियाँ

धरा पिरोती ।

    5

पीली किनारी

छोर-छोर झालर

धरती साड़ी।

   6

रात नीरव

भोर किरण छेड़े

राग भैरव ।

   7

जल अमल

नील झील दर्पण

झाँके कमल ।

   8

गगन -छोर

अनथक उड़ान

पंछी विभोर ।

    9

परम सुखी

सूर्य मुख निहारे

सूरजमुखी ।

    10

 नील गगन

उकेरे किरन ने

 धूप के रंग ।

-0-

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Responses

  1. रँग इन्द्रधनुष के छिटक गए । बहुत सुन्दर हाइकू ।

  2. सभी हाइकु बहुत ही सुंदर शशि जी ,यह तो बहुत ही पसंद आया …बधाई !
    “गगन -छोर
    अनथक उड़ान
    पंछी विभोर ।”

  3. बहुत मोहक हाइकु हैं सभी …लेकिन

    जल अमल
    नील झील दर्पण
    झाँके कमल । ..बहुत सुन्दर बिम्ब दिखा गया ….मेरी ओर से …

    नित विकसे
    ये हाइकु कँवल
    मन निर्मल !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  4. sabhi haiku bahut hi sunder hai shashi ji par saatva aur aathva man ko bahut bhaye ……holi ki shubh kaamnao ke saath badhai

  5. param sukhi , suaya mukh nihare, surajmukhi. bahut sunder bhav hai. sashi ji apake sabhi haiku bahut achhe likhe hain . badhai.
    pushpa mehra.

  6. रंग-रंगीली होली के सुन्दर इंद्रधनुषी हाइकु बहुत सुन्दर !
    आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएँ ! 🙂

    ~सादर
    अनिता ललित


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