Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 13, 2014

बेचैन मन


शैफाली

1

बिन प्रगति 

तड़पे जैसे मीन 

बेचैन-मन  ।

2

रात अँधेरी 

घिरा घटा में चन्दा

दिये का साथ  ।

 3

राहें  कँटीली 

पर्वत-सा जीवन 

मोड़ अनेक  ।

-0

Advertisements

Responses

  1. “रात अँधेरी
    घिरा घटा में चन्दा
    दिये का साथ ।”…..वाह ,.बहुत खूब शैफाली !

  2. सुन्दर भाव पूर्ण हाइकु ..बधाई शैफाली जी !

  3. बहुत सुन्दर हाइकु…बधाई…|

  4. bhaavo se bhare haiku …..bahut sundershefali ji……..holi ke bahut saari shubh kaamnaye

  5. shefali ji apake sabhi haiku bhavon se bhare hain. badhai.
    pushpa mehra.

  6. बहुत सुन्दर, भावपूर्ण हाइकु !
    हार्दिक बधाई शैफाली जी!

    ~सादर
    अनिता ललित


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: