Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 4, 2014

होंठ सी लिये


सुशीला  शिवराण

1.

लड़ी ख़ुद से

हारती ही रही मैं

तेरे प्रेम से।

2.

तुम जो गए

सारे गिले-शिकवे

संग ले गए।

3.

तन्हाइयाँ भी

अब ऊब गई हैं

चले भी आओ।

4.

टूटकर भी

धड़के तेरे लिए

दिल माने ना।

5.

हँसती आँखें

रो देती हैं अक्सर

तन्हा रातों में।

6.

रतजगे हैं

सपने छोड़ गए

आँसू सगे हैं।

7.

होंठ सी लिये

घर टूटे न कहीं

आँसू पी लिये।

8.

यह चाँद भी

तुम्हारा ही अक्स है

बस ख्व़ाब है।

9.

पढ़ते रहे

लफ्ज़ समझ जिन्हें

मेरी रूह थे।

10.

साँसों के साथ

गूँजेगा अनहद

प्रेम का राग।

-0-

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Responses

  1. बेहद भावपूर्ण ,एक से बढ़कर एक हाइकु हैं | ‘होंठ सी लिए ‘ ,’अनहद राग ‘ और ‘चाँद ख़्वाब ‘ बहुत सुन्दर लगे ….हार्दिक बधाई सुशीला जी !!

  2. पढ़ते रहे
    लफ्ज़ समझ जिन्हें
    मेरी रूह थे।…..बहुत सुन्दर ….हार्दिक बधाई सुशीला जी ……

  3. लड़ी ख़ुद से
    हारती ही रही मैं
    तेरे प्रेम से।
    bahut khoob badhai
    rachana

  4. तन्हाइयाँ भी
    अब ऊब गई हैं //

    रतजगे हैं
    सपने छोड़ गए
    आँसू सगे हैं

    tanhai ka oobna aur aansuon ka saga hona …. dono hi ekdam naye dhang ke upmaan aur ekdam anoothi kalpana ….

  5. ohnth sil liye,ghar tute na ahin ansu pi liye . auraton ki yahi to kahani hai.
    sushila ji apke dvara rachit sabhi haiku sarthak abhivyakti hain. badhai.
    pushpa mehra.

  6. bahut hi bhaav purn haiku …eak se badhkar eak…badhai….sushila ji

  7. एक प्यार बंधन
    बंधे डोर से
    दोनों अनजान थे ||

  8. सभी हाइकु बहुत सुंदर है प्रेम के भाव मन की गहराईयों को व्यक्त करते सभी
    हाइकु अच्छे लगे सुशीला जी हार्दिक बधाई
    On Mar 4, 2014 9:03 AM, हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  9. आप सभी की बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभारी हूँ।
    आपका स्नेह मेरी रचनाधर्मिता के लिए प्राणवायु है और स्नेह के सामने आभार बहुत बौना हो जाता है। ये स्नेह बना रहे
    यही प्रार्थना है।

  10. पढ़ते रहे
    लफ्ज़ समझ जिन्हें
    मेरी रूह थे।

    रूह पढ़ ली
    भाव विभोर हूँ मैं
    तृप्त हो गयी ….

    बहुत खूबसूरत हाइकु .

  11. उम्दा हाइकू ..

  12. दिल को छू लिया सभी हाइकु ने सुशीला जी! हर दिल की यही कहानी लगती है !
    सिर्फ़ इतना ही कहेंगे

    ‘आँखें नम हैं
    दिल में उठा तूफाँ
    लफ्ज़ गुम हैं !’

    ~सादर
    अनिता ललित

  13. होंठ सी लिये
    घर टूटे न कहीं
    आँसू पी लिये।
    जाने कितनो की व्यथा है इन शब्दों में…|

    पढ़ते रहे
    लफ्ज़ समझ जिन्हें
    मेरी रूह थे।
    बहुत खूब…|
    खूबसूरत हाइकु के लिए हार्दिक बधाई…|


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