Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 24, 2014

फूलों के गहने


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

1

कौन ले आया ?

ये फूलों के गहने

धरा पहने ।

2

अनुराग सा

जिसने बिखराया

बसंत आया ।

3

वासंती रंग

शर संधान किए

संग अनंग ।

4

कंत बसंत

चिर वियोगिनी सी

उमगी धरा ।

5

ये वरयात्री

कुहू कुहुक  गाएँ

धूम मचाएँ ।

6

झूम झूम के

गाएँ मंगल गान

संध्या ,विहान ।

7

पवन सखी

छेड़ -छेड़ मचले

इतर लगा ।

मुग्धा मुस्काए

अंग-अंग थिरका

धरा लजाए ।

सखी सरसों

कितना मान करे

फूली -सी फिरे ।

–0-

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Responses

  1. वाह! क्या सुन्दर छटा बिखेरता वसंत …
    बहुत सुन्दर हाइकु !

    सस्नेह
    अनिता ललित

  2. basant par likhe sabhi haiku bahut sunder hain badhai.
    pushpa mehra.

  3. धरा के रंग
    सिमटे हाइकू में
    अभिनव हैं ।
    बेहतरीन हाइकू ।

  4. वासंती छटा बिखेरते हुए रंग रस से भरपूर सुन्दर हाइकू !

  5. सजी हुई धरा के विभिन्न रूप और आपकी कल्पना को साधुवाद ज्योत्स्ना जी |

    शशि पाधा

  6. सभी एक से बढकर एक लगे .

  7. हृदय से आभार आप सभी का |

    सादर !
    ज्योत्स्ना शर्मा

  8. मुग्धा मुस्काए
    अंग-अंग थिरका
    धरा लजाए ……साधुवाद ज्योत्स्ना जी |

  9. बहुत आभार Dr Anita Kapoor ji

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  10. खूबसूरत हाइकु…हार्दिक बधाई…|


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