Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 15, 2014

प्रेम दिवस – 2


हरकीरत हीर

1.

देख उगा है 

मुहब्बत का चाँद 

मुस्कान लिए । 

2.
हौले में तुम 

छू जाना सबा संग 

यादों की तार । 

3.

देह से नहीं 

होती है मुहब्बत 

पाक रूह से । 

4.

मुहब्बत है 

रब्ब की इबादत

खेल नहीं है । 

5.

लिखना तुम 

सागर की छाती पे 

प्रेम का गीत । 

6.

हीर रांझे की 

मुहब्बत वो पाक 

सदियों याद । 

 

7.

चनाब रोई  

सोहणी महिवाल 

आया न कोई । 

***************

 

Advertisements

Responses

  1. prem ki pavitr gunj se bhare sabhi haiku bahut ache likhe hain. harkirat ji apako badhai.
    pushpa mehra.

  2. Chanaan royi
    aaya n koi
    Vaah Harkeet ! aapki qalam kalpana ko haqeeqat aur haqeeqat ko yatharth ka jama pahnane mein saksham hai. Badhai

  3. सच्ची मोहब्बत की तस्वीर खींचते इन खूबसूरत हाइकु के लिए हार्दिक बधाई…|

  4. बहुत दिनो की व्यस्तता के बाद जब आज हिन्दी हाइकु मेल पर खोला तो बस दिल खुश हो गया ,इंटरनेट की माया समझ नहीं आती है …कभी यह ब्लॉग खुल जाता है, कभी उनकी भाषा में कुछ ऐसी सेटिंग मांगता है कि दिमाग चकरा जाता है …मैं सुधा गुप्ता जी ,कंबोज भाई ,हरदीप जी ,शशि पाधा जी ,शशि पुरवार जी, भावना कुँवर जी ,रचना श्रीवास्तव जी ,और अनीता कपूर जी के हाइकु के अलावा किसी के हाइकु नहीं पढ़ पा रहीं हूँ ,कह नहीं सकती क्या हुआ ? शायद कुछ ऐसा क्लिक दब गया है या क्या हुआ है ? कोई बता सके तो ….और बहुत विशेषज्ञा भी नहीं हूँ इंटरनेट की, कौन जाने यह मेल पहुंचेगा या नहीं! बस मेल पर बॉक्स खुला है और इतने सुंदर हाइकु मैं पढ़ रही हूँ !….काश !गागर में सागर भरने वाले इन हाइकु के लिए बहुत बहुत आभार !
    बहरहाल, अभी आज की बात करती हूँ …हरदीप जी आनंद आ गया आपके हाइकु पढ़ कर क्या कहूँ …कोई शब्द नहीं मिल रहे हैं
    “- मुहब्बत है
    रब्ब की इबादत
    खेल नहीं है । ”
    बहुत ही खूबसूरत बात इतनी सरलता से कह जाने की इस बानगी पर सलाम आपको!
    “- हौले में तुम
    छू जाना सबा संग
    यादों की तार । ”
    इस हाइकु के शब्द गहरे छू गए ! और
    “-चनाब रोई
    सोहणी महिवाल
    आया न कोई ।”
    इसकी गहराई को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता !
    पुन : आपको सलाम ,शत- शत सलाम !

  5. सुधार के साथ दुबारा प्रेषित पत्र:
    बहरहाल, अभी आज की बात करती हूँ …हरदीप जी आनंद आ गया
    प्रेम दिवस– 2 हाइकु की प्रस्तुति पर :

    बहुत दिनो की व्यस्तता के बाद जब आज हिन्दी हाइकु मेल पर खोला तो बस दिल खुश हो गया ,इंटरनेट की माया समझ नहीं आती है …कभी यह ब्लॉग खुल जाता है, कभी उनकी भाषा में कुछ ऐसी सेटिंग मांगता है कि दिमाग चकरा जाता है …मैं सुधा गुप्ता जी ,कंबोज भाई ,हरदीप जी ,हरकिरत कौर जी ,शशि पाधा जी ,शशि पुरवार जी, भावना कुँवर जी ,रचना श्रीवास्तव जी ,और अनीता कपूर जी के हाइकु के अलावा किसी के हाइकु नहीं पढ़ पा रहीं हूँ ,कह नहीं सकती क्या हुआ ? शायद कुछ ऐसा क्लिक दब गया है या क्या हुआ है ? कोई बता सके तो ….और बहुत विशेषज्ञा भी नहीं हूँ इंटरनेट की, कौन जाने यह मेल पहुंचेगा या नहीं! बस मेल पर बॉक्स खुला है और इतने सुंदर हाइकु मैं पढ़ रही हूँ और कमेंट लिख पा रही हूँ !… !
    हरदीप जी आनंद आ गया आपके प्रेम दिवस– 2…. हाइकु की प्रस्तुति पर …कोई शब्द नहीं मिल रहे हैंl
    सुंदर प्रस्तुतीकरण हरदीप जी का और सुंदर हाइकु हरकिरत जी के …मन हर गए !
    “- मुहब्बत है
    रब्ब की इबादत
    खेल नहीं है । ”
    बहुत ही खूबसूरत बात इतनी सरलता से कह जाने की इस बानगी पर सलाम आपको!
    “- हौले में तुम
    छू जाना सबा संग
    यादों की तार । ”
    इस हाइकु के शब्द गहरे छू गए ! और
    “-चनाब रोई
    सोहणी महिवाल
    आया न कोई ।”
    इसकी गहराई को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता !
    पुन : आपको सलाम ,शत- शत सलाम !

  6. प्रेम की पावनता को समेटे बहुत मोहक हाइकु ….बहुत बधाई हरकीरत हीर जी


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: