Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 1, 2014

मन के द्वार हजार –


समीक्षा

मन के द्वार हजार – ऋता शेखर ‘मधु’

ईश्वर की अनुपम कृति है मनुष्य और मनुष्य की अनुपम अनुभूति है मन। अनुभूति की अनुपम अभिव्यक्ति है भाषा। भाषा शब्दों की वह शैली है जो मन के करीब होती है और दिल की गहराइयों में उतर जाती हे। सद्य प्रकाशित पुस्तक ‘मन के द्वार हजार’ सिद्धहस्त हाइकुकार रचना श्रीवास्तव जी की पुस्तक है जिसमें उन्होंने हिन्दी हाइकु का अवधी भाषा में अनुवाद किया है। अवध की भाषा भी मीठी मर्यादित है। इसे सभी पाठक पुस्तक पढ़कर महसूस कर सकेंगे। हिन्दी भाषा के हाइकुओं का अवधी भाषा में अनुवाद कर कवयित्री रचना जी ने भाषा पर अपनी पकड़ एवं लेखन की विस्तृता का अद्भुत परिचय दिया है। इस पुस्तक में रचना जी ने 34 हाइकुकारों के कुल 542 हाइकु को अवधी में सफलतापूर्वक  अनूदित किया है। इस ऐतिहासिक महत्त्व के कार्य के लिए रचनाकार रचना जी कोटिशः बधाई की पात्र हैं।

अब पढ़ते हैं उनके द्वारा अनूदित कुछ हाइकु जो रचना जी की रचनाधर्मिता एवं सामर्थ्य सहज ही उद्धृत करेगा। प्रस्तुत है पुस्तक में शामिल  कुछ  रचनाकारों के एक-एक हाइकु का अवधी अनुवाद जिसमें रचना जी की लेखनी का सुखद स्पर्श मिला है…

1- डॉ भगवत शरण अग्रवाल-

धन्य बरखा/ खेतवा मा कविता/ बोवे किसान

2- डॉ सुधा गुप्ता-

दियवा लागे/ घटिया मा खिलत/ डैफोडिल हैं

3- डॉ रमाकान्त श्रीवास्तव-

केकर पीरा/ बनिके घटा छाई/ मेघवा घिरा

4- डॉ सतीशराज पुष्करणा-

हँसा ऐ दोस्त/ रोये से ई रतिया/ छोट न होई

5- डॉ उर्मिला अग्रवाल-

याद पिजरा/ तरपत रहत/ मन सुगवा

6- रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’-

मईया याद/ मन्दिर के दियवा/ जरे हमेसा

7- डॉ भावना ‘कुँअर’-

बुझै सागर/ सुरज ठनढाय/ जरत चाँद

8- डॉ हरदीप कौर सन्धु-

बिटियन से/ घरवा गुलसन/ खिलै अँगना

9- पूर्णिमा बर्मन-

देस हमरा/ सबहिं को पियारा/ ज़िन्दगियो से

10- रचना श्रीवास्तव-

चैन से सोवे/ अचरवा के छाँव/ माई जे जागे

11- सुदर्शन रत्नाकर-

बहुते हेरा/ मकनवा मिला/ घरवा नाही

12- कमला निखुर्पा-

काहे चुप है/ बरगदवा बाबा/ दढीया बढी

13- प्रियंका गुप्ता-

होंठवा हँसी/ देखियु के समझे/ मन कै पीरा

14- डॉ जेन्नी शबनम-

गोड़वा जख्मी/ रहिया मा कँटवा/ कहवाँ जाईं

15- सुभाष नीरव-

दुख गहिरा/ पियवा मिलन पै/ कब ठहिरा

16- डॉ अनीता कपूर-

रात बिछौना/ सपन के तकिया/ निंदिया सौत

17- मंजु मिश्रा-

अनेकों भासा/ हमरे देसवा म/ तब्बो है एक

18- मुमताज टी एच खान-

मन-बगिया/ खुसबू फैईरावै/ मिठ बोलिया

19- डॉ अमिता कौण्डल-

अखिया सून/ धुआ भै सपनवा/ इहै गरीबी

20- ऋता शेखर ‘मधु’-

पनिया गिरे/ उडै सोंध खुसबू/ धोई धरती

21- डॉ श्याम सुन्दर ‘दीप्ति’-

रहिया मिले/ पाथर इठाई के/ पुल बनायो

22- सीमा स्मृति-

काहे हमेसा/ अनहोनी के डर/ उमरि भर

23- डॉ ज्योत्सना शर्मा-

गहरी पीरा/ मेघवा कै मनवा/ टूटी जाति बा

24- अनीता ललित-

उमंगिया मा/ पिरेम उजास मा/ दोस्ती कै बास

25- कृष्णा वर्मा-

फुलवा पटी/ बगिया के कियारी/ गंध ठुमकी

26- तुहिना रंजन-

दुखवा भारी/ मछरी परेसान/ गन्दा पनिया

बाल हाइकुकारौं के हाइकुओं के भी अनुवाद किया है रचना जी ने-

27- सुप्रीत सन्धु-

मुस्किल आवे/ रौसनी कै मिनार/ बनत माई

28- ऐश्वर्या कुँअर-

बरखा आवै/ सागर मा नहावै/ ई डूबै जाये

29- ईशा रौहतगी-

आवत-जात/ दुख अउर सुख/ इहै जिन्नगी

30- अन्वीक्षा श्रीवास्तव-

आपन पंख/ तितली फैहरावै/ आकास रंगे

31- इला कुलकर्णी-

माई रोवत/ तुहें याद कैई के/ हमहू रोई

पाठक यह अवश्य महसूस करेंगे कि रचना जी ने अनुवाद में हाइकु के मूल भाव को समेटते हुए लय और प्रवाह का भी पूरा ख्याल रखा हे। भविष्य में भी कवयित्री अपनी लेखनी से हाइकु के क्षेत्र में अनुपम योगदान देती रहेंगी, इसी आशा और विश्वास के साथ शुभकामनाएँ !!

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Responses

  1. अवधी जानने वाले खड़ी बोली में भी पढ़ सकते हैं । पर अवधी में अनुवाद का स्वागत करता हूँ ।

  2. BAHIN JI, PRANAM.
    RACHANAON KE ANUVAD SE MOOL RACHANAKAR KO SMMAN MILATA HAI. BADHAI.

  3. Dr Sudhesh ji
    aapki baat sahi hai bas bhasha ko is tarah se jinda rakha ja sakta hai .aur jo log keval avdhi hi bolte hain unko ise padh ke bhi achchha lage ga tatha mere badon ko mera uphar hoga yahi sab soch ke kiya tha ye anuvad
    dhnyavad
    Rachana.

  4. Navneet ji

    mool rachna karon ka abhar hai jo unhone apni rachnayen mujhe anuvad karne ko din
    dhnyavad
    Rachana

  5. मूल रचनाओं की मिठास तो मानो इस अनुवाद से कई गुना बढ़ी सी लगती है…| एक सुन्दर, सहेजे जाने लायक संग्रह की उतनी ही मीठी समीक्षा…|
    आभार रचना जी और ऋता दी…|

  6. बहुत अच्छी समीक्षा की है ऋता जी ने. अवधी तो नहीं जानती थी लेकिन काफी सारे शब्द बिहार की बोलियों से मिलते हैं, अतः पढ़ना बहुत अच्छा लगा. रचना जी ने सचमुच बहुत अद्भुत काम किया है. रचना जी और ऋता जी का आभार.


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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