Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जनवरी 28, 2014

धरा हर्षित


सुदेष्णा सामंता
1
ये अग्नि वर्षा
सर्वत्र अनावृष्टि
सूखी धरती ।
2
पेड़ो पे झूले
सावन की बहार
साज शृंगार ।
3
कूके कोयल
लो गूँजा है मल्हार
धरा हर्षित।
-0-

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Responses

  1. सुन्दर प्राकृतिक चित्रण !
    सुदेष्णा सामंता जी आपको हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  2. प्रकृति के भिन्न रूपों को प्रस्तुत करते सुन्दर हाइकु …बहुत बधाई !


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